इसे पढ़ने वाला ख़ुशनसीब ही होगा👇👇👇राहे ख़ुदा में ख़र्च करने के बारे क़ुरआन की आयते मुबारका👇👇👇 “तुम हरगिज़ भलाई को न पहुँचोगे जब तक राहे ख़ुदा में अपनी प्यारी चीज़ ना खर्च करो और तुम जो कुछ ख़र्च करो अल्लाह को मालूम है”(सुरः आले इमरान आयत नं.92) “हज़रत अबु तल्हा अंसारी मदीने में बड़े मालदारContinue reading “आओ मिलकर मदद करे मुसलमानों की”
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रोज़े के मुताल्लिक जानकारी और मसले
हदीस :- इने माजा हज़रते अनस रदियल्लाहु तआला अन्हु से रावी कहते हैं रमज़ान आया तो हुजूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फरमाया यह महीना आया इसमें एक रात हज़ार महीनों से बेहतर है जो इससे महरूम रहा हर चीज़ से महरूम रहा और उसकी खैर से वही महरूम होगा जो पूरा महरूम है ।Continue reading “रोज़े के मुताल्लिक जानकारी और मसले”
ईमान व अक़ीदे से ज्यादा अमल को अहमियत देना ???
हमारे काफी अवाम भाई किसी की ज़ाहिरदारी कोई अच्छा काम देखकर उसकी तारीफ करने लगते हैं और (प्रभावित) हो’ जाते हैं जबकि इस्लामी नुक़्तए नज़र से कोई नेकी उस वक़्त तक कारआमद नही जब तक कि उसका ईमान व अक़ीदा दुरूस्त न हो।रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने जब ऐलाने नवुब्बत फ़रमाया था तो पहलेContinue reading “ईमान व अक़ीदे से ज्यादा अमल को अहमियत देना ???”
जिस औरत के ज़िना का हमल हो उससे निकाहजाइज़ है⏬⏬⏬⏬⏬⏬⏬⏬⏬⏬⏬⏬⏬⏬⏬⏬⏬ज़ानिया हामिला यानी वह औरत जो बिना निकाह किए ही गर्भवती हो गई हो उससे निकाह को कुछ लोग नाजायज़ समझते हैं हालांकि वह जाइज़ है । ज़िना इस्लाम में बहुत बड़ा गुनाह है और इसकी सज़ा बहुत सख्त है लेकिन अगर किसी औरत से ज़िनाकारी सरज़द हुई , उससे निकाह किया जाये तो निकाह सही हो जाएगा,ख्वाह वह ज़िना से हामला हो गई हो जबकि वह औरत शौहर वाली न हो और निकाह अगर उसी शख्स से हो जिसका हमल है तो निकाह के बाद वह दोनों साथ रह सकते हैं , सुहबत व हमबिस्तरी भी कर सकते हैं और किसी दूसरे से निकाह हो तो जब तक बच्चा पैदा न हो जाए दोनों लोगों को अलग रखा जाए और उनके लिए हमबिस्तरी जाएज़ नहीं ।⤵⤵⤵⤵⤵⤵⤵⤵⤵⤵⤵⤵⤵⤵⤵⤵⤵⤵⤵⤵⤵⤵⤵⤵⤵⤵⤵इमामे अहले सुन्नत सय्यिदी आला हजरत फरमाते हैं⬇⬇⬇⬇⬇⬇⬇⬇⬇⬇⬇⬇⬇⬇⬇⬇⬇⬇⬇⬇⬇⬇⬇⬇⬇⬇⬇⬇⬇⬇⬇⬇⬇⬇⬇⬇⬇⬇जो औरत मआज़ल्लाह ज़िना से हामिला हो उससे निकाह सही है ख्वाह उस ज़ानी से हो या गैर से फ़र्क़ इतना है अगर ज़ानी से निकाह हो तो वह बादे निकाह उससे कुर्बत भी कर सकता है और गैर ज़ानी से हो तो वज़ए हमल तक( बच्चा पैदा होने तक) कुर्बत न करे।( फतावा रज़विया जिल्द 5 ,सफ़हा 199, फतावा अफ्रीका ,सफ़हा 15)
हदीस क्या है? किसे कहते ? और कितने तरह की होती है ।
*Ilm E Hadees* *Sabaq 1* *Hadees Ki Tareef* *Hadees :* *Lugvi Maani : “ Nayi Cheez” , Aur “Baat Karna”* *Istelahi Maani : Huzur ﷺ K Qaul ,Fayl ,Taqreer Ya Sifat Wa Haal Ko Hadees Kehte Hai, Aur Kabhi Isko “Khabar” Bhi Kehte Hai.* *Lekin Baaz Muhaddiseen Ne Hadees Aur Khabar Me Aam Aur KhaasContinue reading “हदीस क्या है? किसे कहते ? और कितने तरह की होती है ।”
बाद तौबा मुरतद और बदमज़हब से निकाह क्या हुकुम है ??जब कोई नाम निहाद सुन्नी किसी मुरतद के यहाँ रिश्ता करना चाहता है तो दुनियादार मौलवी शैतानी फरेब से काम लेता है यानी तौबा कर के निकाह पढ़ा देता है और पैसा लेकर अपना रास्ता पकड़ता है, और तौबा करने वाला मुरतद पहले की तरह ही अपने रास्ते पर रहता हैइस लिए शरीयत का यह हुकुम है कि तौबा के फौरन बाद उससे निकाह नही किया जायेगाबल्कि कुछ दिनों उसे देखा जाएगा कि अपनी तौबा पर क़ायम है या नही ??जैसे कि फ़ासीके मोअलिन तौबा के फौरन बाद इमाम नही बना दिया जाताफतावा रजविया जिल्द 3 सफह 213 में है कि फतावा काज़ी खां फिर फतावा आलमगीरी में है किफ़ासिक़ तौबा कर ले फिर भी उसकी गवाही ना मानी जाएगी जब तक की इतना वक़्त ना गुजर जाये की उसकी तौबा का असर जाहिर होऔर आला हजरत इमाम अहले सुन्नत फ़ाज़िले बरेलवी लिखते है की अमीरुल मोमिनिन हज़रत फारुके आज़म रज़ियल्लाहु अन्हु ने जब “सुबैग” से जिस पर से बवजहे बहस मुतशाबिहात बद मज़हबी का अंदेशा था बाद जरबे शदीद तौबा कर ली । हज़रत अबु मूसा अशअरी रज़ियल्लाहु के पास फरमान भेजा कि “मुसलमान उसके पास ना बैठे” “उसके साथ खरीद व फरोख्त ना करे” ‘बीमार पड़े तो उसकी अयादत को ना जये’ “और मर जाये तो उसके जनाजे में हाज़िर ना हो”बतामिले हुक्मे अहकाम (इस बड़े हुकुम को मानने के साथ) एक मुद्दत तक यही हाल रहा की सौ आदमी बैठे होते और वह आता सब मुतफ़र्रिक ( तितर बितर) हो जातेजब हज़रत अबु मूसा अशअरी ने अर्ज़ी भेजी की अब उसका हाल अच्छा हो गया है तब इज़ाज़त फरमाई , फतावा रजविया जिल्द 3 सफह 213आला हजरत मुज़दिदे दिनों मिल्लत ने इस वाकिये के सबूत में 5 हदीसे को नकल फरमाया हैदेखिये सुबैग यानी आयते मुतशाबिहात के मिसल में बहस किया करता था जबकि वह मुरतद नही था बल्कि उसके बद मज़हब होने का डर था मगर उसके बावजूद हज़रत उमर फारूक रज़ियल्लाहु अन्हु ने तौबा के बाद भी सख्त बायकाट किया जब तक कि इत्मिनान नही हो गयालिहाज़ा मुरतद और बद मज़हब के तौबा करने के बाद बदर्जये औला (जरूर) कई बरस तक देखा जाएगा जब तक उसकी बात चीत और तौर तरीकों से खूब इत्मिनान ना हो जाये की वह अहले सुन्नत व जमात का हो गया तब उसके साथ निकाह किया जाएगा वरना नहीलिहाज़ा जो सख्स मुरतद या मुरतद्दह को तौबा करने के बाद फौरन उनके साथ अपने लड़के लड़की की शादी करे या जो मौलवी निकाह पढे मुसलमानो को चाहिए कि इनका मज़हबी बायकाट करे । ऐसे दुनियादार मौलवी के पीछे नमाज़ ना पढेबहवाला :- बद मजहबो से रिश्तेसफह :-19 व 20लेखक :- मुफ़्ती जलालुद्दीन अहमद अमज़दी
इस्लाही पोस्ट नमाज़ के अहम मसले
📝सवाल अस्र या इशा के फ़र्ज़ों से पहले जो चार रक़अ्त सुन्नत गैर मुअक्क़दह पढ़ी जाती हैं उनके क़अदए ऊला में अत्तहिय्यात के बाद दुरूद शरीफ़ पढ़ना चाहिये या नहीं ? अकसर लोग अत्तहिय्यात पढ़ कर तीसरी रक़अ्त के लिये खड़े हो जाते हैं ?✍🏻जवाब : सुन्नते गैर मुअक्क़दह और नवाफ़िल के क़दए ऊला मेंContinue reading “इस्लाही पोस्ट नमाज़ के अहम मसले”
अल्लाह को हाज़िर नाज़िर कहना कैसा ??
अल्लाह को हाज़िर नाज़िर नही कहना चाहिए क्योंकि अल्लाह जगह और मकान से पाक है हकीमुल उम्मत मुफ़्ती अहमदयार खान नईमी फरमाते है हर जगह हाज़िर नाज़िर होना खुद की सिफ़त हरगिज़ नही खुदा जगह और मकान से पाक है हवाला :- जाअल हक आप से पुरखुलुस गुजारिश पोस्ट को पढ़ने के बाद दूसरे मुसलमानContinue reading “अल्लाह को हाज़िर नाज़िर कहना कैसा ??”
नमाज़ के मसले अहकाम
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 🌹 بِسمِ اللّٰہِ الرَّحمٰنِ الرحیم،،الحمدللہ رب العالم सवाल,1, अगर किसी ने नमाज़ की हालत में पहली रकात में सुरए नास पढ़ी तो अब दूसरी रकात में कोन सी सूरत पढ़े 🌹 जवाब,👉🏻C,दूसरी रकात में भी सुरए नास ही पढ़े,, 🌹🌹🌹🌹🌹🌹 सवाल2, हालते नमाज़ में तादीले अरकान यानी कौमा, जल्सा, रुकुअ, सज्दा,में कम से कमContinue reading “नमाज़ के मसले अहकाम”
खून ,जनाजे की नमाज़ , व वजु बाद मेकअप का बयान
🌺 सवाल,1, , वो कौन सा खून है जो खुद उस के लिए पाक है और दूसरों के लिए नापाक 🍁 जवाब👉 शहीद का खून खुद उसे के लिए पाक है , और दूसरों के लिए नापाक (मख्ज़ने मालूमात 149) 🍁🍁🍁 🌺 सवाल,2, क्या औरतें वूज़ू करने के बाद मेकअप करके नमाज़ पढ़ सकती हैंContinue reading “खून ,जनाजे की नमाज़ , व वजु बाद मेकअप का बयान”
इस्लामी मालूमातो का खजाना
🌻 بِسمِ اللّٰہِ الرَّحمٰنِ الرحیم 📔 सवाल,1, किस तरह की मछली हराम है 💛 जवाब, मछली बिना मारे अपने आप मर कर पानी की सतह पर उलट गई वो हराम है,अगर मछली को मारा और वो उलट कर तैरने लगी तो हराम नहीं दुर्रे मुख्तार जिल्द 1 पेज 445 🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 📔 सवाल ,2, किसी मुसलमानContinue reading “इस्लामी मालूमातो का खजाना”
कर्ज़ की अदायगी में जानबूझकर देरी करना कैसा है ??
🌻 بِسمِ اللّٰہِ الرَّحمٰنِ الرحیم क़र्ज़ की अदाएगी (क़र्ज़ चुकाना) में बिला वजह (बिना किसी कारण के) ताख़ीर (देरी) करना गुनाह हैध्यान दें :-अगर क़र्ज़दार क़र्ज़ अदा कर सकता है तो क़र्ज़ख़्वाह (जिससे क़र्ज़ लिया है) की मर्ज़ी के बग़ैर एक घड़ी भर भी अगर देर करेगा तो गुनहगार होगा, चाहे नमाज़ में हो, रोज़ेContinue reading “कर्ज़ की अदायगी में जानबूझकर देरी करना कैसा है ??”
नगीनो (पथ्थर) की तासीर व पर्दे के अहकाम और सितारों का बयान
📘 सवाल,1, , क्या नगीनों की कोई तासीर होती है 🛢 जवाब,,, जी नहीं कोई भी तासीर नहीं होती 🚤 👉 आदमी के नामों से पत्थरों का हिसाब किताब निकालना ये सिर्फ पैसे कमाने का फन है ,,, इस के अलावा ये कहना के फुलां पत्थर पहनने से आदमी फलता फूलता है मालदार बन जाताContinue reading “नगीनो (पथ्थर) की तासीर व पर्दे के अहकाम और सितारों का बयान”
काफिर को काफिर नही कहना चाहिए कहना कैसा ???
🌹 بِسمِ اللّٰہِ الرَّحمٰنِ الرحیم ❤ ये कहना के काफिर को काफिर ना कहो ,ये सरीह (साफ) कुफ्र है ,,,काफिर को काफिर कहना ज़रूरियाते दीन से है👉 जो शख्स ये कहता है के काफिर को काफिर ना कहो वो खुद काफिर है,,, इस पर तमाम कलीमा पढ़ने वाले फिर्कों का इत्तेफाक है के “काफिर कोContinue reading “काफिर को काफिर नही कहना चाहिए कहना कैसा ???”
एक शख्स का ये कहना कि तेरे पीर से मेरा पीर अच्छा ,कहना कैसा है
🌻 بِسمِ اللّٰہِ الرَّحمٰنِ الرحیم एक शख्स का दूसरे शख़्स से ये कहना की हमारे पीर तुम्हारे पीर से ज़्यादा अच्छे हैंयाहमारा सिलसिला तुम्हारे सिलसिले से बेहतर हैयाहमारे पीर के मुरीद (Followers) ज़्यादा हैं और तुम्हारे पीर के कम याहमारे पीर का ख़ानदान तुम्हारे पीर के ख़ानदान से बढ़ चढ़ कर है 👈 ये सबContinue reading “एक शख्स का ये कहना कि तेरे पीर से मेरा पीर अच्छा ,कहना कैसा है”
फ़ासिक़ , गुनहगार को पीर बनाना कैसा है??
🌻 بِسمِ اللّٰہِ الرَّحمٰنِ الرحیم 💛 الحمدللہ رب العالمین،اللہم صل علی سیدنا محمد इल्मे दिन सीखना मुसलमान पर फ़र्ज़ है फ़ासिक़ (गुनहगार) और बद अक़ीदा (जिसका अक़ीदा {मान्यता} सही ना हो) को अपना पीर बनाना हराम हैयदि पीर बद अक़ीदा हो जाए या बड़े गुनाहों (कबीरा गुनाहों) पर अड़ा रहे (करता रहे) तो हमें मुरीदीContinue reading “फ़ासिक़ , गुनहगार को पीर बनाना कैसा है??”
इस्लाही मालूमात (इल्मे दिन सीखना फ़र्ज़ है)
بِسمِ اللّٰہِ الرَّحمٰنِ الرحیم 📕 👉 किसी भी झुटी बात पर अल्लाह को गवाह बनाना या झुटी बात पर जान बूझकर ये कहना के “अल्लाह जानता है” ये कलिमए कुफ्र है 👉 फुकाहा केराम फरमाते हैं ;- जो शख्स कहे अल्लाह जानता है के ये काम मैंने किया है ,हालांकि वो काम उस ने नहींContinue reading “इस्लाही मालूमात (इल्मे दिन सीखना फ़र्ज़ है)”
गैर मुस्लिमों के त्यौहार में शरीक होना कैसा है ???
सिर्फ दिखावे के लिए भी मंदिर में पूजा पाठ मिन्नत व समाजत करना कुफ्र है ✍ शारहे बुखारी मुफ्ती शरीफुल हक अमजदी फतावा शारहेे बुखारी कीताबुल अकाइद जिल्द 2 पेज 615 में ऐसे ही एक सवाल के जवाब में फरमाते हैं :- ज़ैद अपने इस काम की वजह से काफिर और मुरतद हो गया इस्लामContinue reading “गैर मुस्लिमों के त्यौहार में शरीक होना कैसा है ???”
कौन से मरे हुए जानवर खाना जायज है
*🌹بسم الله الرحمن الرحيم 🌹** `*“🌹🌹الصــلوة والسلام عليك يارسول اللهﷺ🌹*🌹〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 📓 (1) 👉 इब्ने उमर رضی اللہ عنہ से रिवायत ही के नबिए पाक صلی اللہ علیہ وسلم ने इरशाद फ़रमाया हमारे लिए 2 खून और 2 मुरदार (मरे हुवे जानवर) हलाल (जाइज़) है।👉 2 खून यानी कलेजी और तिल्ली👉 2 मरे हुवे जानवर यानीContinue reading “कौन से मरे हुए जानवर खाना जायज है”
नमाज़े जुमा का अहम बयान व शर्त
📗 सवाल / Question (1) नमाज़े जुमा की कितनी शर्त है(यानी नमाज़े जुमा कायम करने की शर्त) सवाल (2) नमाज़े जुमा की फ़र्ज़ होने कितनी शर्त है(यानी नमाज़े जुमा पढ़ने की शर्त) हदीस मुबारक तिर्मिज़ी रावी है कि यज़ीद इब्ने अबी मरियम कहते है कि मैं जुमे को जाता था उबाया इब्ने रिफाआ इब्ने राफेआContinue reading “नमाज़े जुमा का अहम बयान व शर्त”