काफिर को काफिर नही कहना चाहिए कहना कैसा ???

🌹 بِسمِ اللّٰہِ الرَّحمٰنِ الرحیم

ये कहना के काफिर को काफिर ना कहो ,ये सरीह (साफ) कुफ्र है ,,,काफिर को काफिर कहना ज़रूरियाते दीन से है
👉 जो शख्स ये कहता है के काफिर को काफिर ना कहो वो खुद काफिर है,,, इस पर तमाम कलीमा पढ़ने वाले फिर्कों का इत्तेफाक है के “काफिर को काफिर ही कहना चाहिए” बल्कि काफिर को काफिर कहना ज़रूरी है

❤👉 यहां तक के उलेमा ए किराम ने कहा लिखा के “”काफिर के कुफ्र में,उस के अज़ाब के हकदार होने शक करने वाला काफिर है

क़ुरआन मजीद में जगह जगह काफिरों को काफिर कहकर ही खिताब किया गया है
قل یایھا الکافرون
फरमा दो ए काफिरों

❤👉 इस आयत में قل अम्र है इस का मतलब ये हुआ के हुज़ूर صلی اللہ علیہ وسلم को हुक्म दिया गया के काफिरों को ए काफिरों कहकर खिताब करो,,

हवाला

फतावा शारहे बुखारी जिल्द 2 पेज 424

औरतों का बुरखा नकाब डिजाइनवाला तड़क भड़क वाला जिस्म से चिपक हुआ पहन कर कहि जाना कैसा है ??


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📕 जवाब, B, :- नहीं जा सकती, क्यूंकि इस में सरासर फित्ना है जितना पुर कशिश और डिज़ाईन वाला निकाब होगा उतना ही ज़्यादा फित्ना होने का इमकान होता है
🌹👉 हकिमुल उम्मत हज़रत हज़रत मुफ्ती अहमद यार खां फरमाते हैं “औरत पर ज़रूरी है के लीबासे फाखिरा या उम्दा बुर्का ओढ़कर बाहर ना जाए क्यूंकि भढ़कदर बुर्का पर्दा नहीं बल्कि ज़ीनत है”

🌹 बुर्का कैसा हो 👉 मोटे कपड़े का ढीला ढाला सादा सा बुर्का हो “जिस को पहनने वाली के बारे में अंदाज़ा लगाना दुशवार हो जाए के जवान है या बूढ़ी

हवाला
दिलचस्प मालूमात पेज 35,,, पर्दे के बारे में सवाल जवाब पेज 185,,,,पर्दे के बारे में सवाल जवाब पेज 275

Published by husainfoundation374

सुन्नी हनफ़ी अहले सुन्नत वल जमात मसलके आला हजरत

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