🌻 بِسمِ اللّٰہِ الرَّحمٰنِ الرحیم
💛 الحمدللہ رب العالمین،اللہم صل علی سیدنا محمد
इल्मे दिन सीखना मुसलमान पर फ़र्ज़ है
फ़ासिक़ (गुनहगार) और बद अक़ीदा (जिसका अक़ीदा {मान्यता} सही ना हो) को अपना पीर बनाना हराम है
यदि पीर बद अक़ीदा हो जाए या बड़े गुनाहों (कबीरा गुनाहों) पर अड़ा रहे (करता रहे) तो हमें मुरीदी तोड़ देनी चाहिए
नोट:-
आज कल कुछ ऐसे मक्कार धोके बाज़ फर्जी पीर मार्केट में हैं जो ये कहते हैं की शरीअत का रास्ता और है और फ़क़ीरी का रास्ता, और ये फर्जी पीर शरीअत के ख़िलाफ़ चला करते हैं
👆👆लिहाज़ा इनसे दूर रहें
और अगर ऐसे बाबा या फर्जी पीर से कोई चमत्कार दिखे तो समझ जाएं की ये जादू या नज़रबंद है
सवाल – पीर कैसा होना चाहिए?
जवाब- पीर शरीअत पे चलने वाला होना चाहिए जो नमाज़ रोज़ा का पाबंद हो और अपने मुरीदों को भी शरीअत पे चलने की ताकीद करे और तमाम फ़ितनो और झगड़ों से ख़ुद दूर रहे और अपने मुरीदों को भी दूर रहने की ताकीद करे
हवाला 📚
जन्नती ज़ेवर