
📝सवाल अस्र या इशा के फ़र्ज़ों से पहले जो चार रक़अ्त सुन्नत गैर मुअक्क़दह पढ़ी जाती हैं उनके क़अदए ऊला में अत्तहिय्यात के बाद दुरूद शरीफ़ पढ़ना चाहिये या नहीं ? अकसर लोग अत्तहिय्यात पढ़ कर तीसरी रक़अ्त के लिये खड़े हो जाते हैं ?
✍🏻जवाब : सुन्नते गैर मुअक्क़दह और नवाफ़िल के क़दए ऊला में दुरूद शरीफ़ और तीसरी रक़अ्त में सना पढ़ना चाहिये, इस लिये कि सुन्नते गैर मुअक्क़दह और नवाफ़िल में हर दो रक़अ्त मुस्तक़िल नमाज़ है और दो रक़अ्त के बाद जो क़दा है वह क़दए अख़ीरा के हुक्म में है, कुतुबे फ़िक़ह में इस मस्अले की सराहत मौजूद है।
📝सवाल : अगर इमाम अत्तहिय्यात पूरी करके तीसरी रक़अ्त के लिए खड़ा हो जाए और मुक़्तदी अत्तहिय्यात पूरी न पढ़ सके तो उस सूरत में मुक़्तदी इमाम के साथ खड़ा हो जाए या अत्तहिय्यात पूरी करके खड़ा हो ?
✍🏻जवाब : मुक़्तदी अपना तशहुद यानी अत्तहिय्यात पूरी करके खड़ा हो।
👇🏻 फ़तावा आलमगीरी में है:
✍🏻 मुक़्तदी के तशहुद पूरा करने से पहले इमाम खड़ा हो जाए या नमाज़ के क़दए अख़ीरा में मुक़्तदी के तशहुद पूरा करने से पहले इमाम सलाम फेर दे तो मुख़्तार और सही यह है कि मुक़्तदी तशहुद पूरा करे।
📕 (इस्लाह़ुल अवाम सफा, 24,24)