कर्ज़ की अदायगी में जानबूझकर देरी करना कैसा है ??

🌻 بِسمِ اللّٰہِ الرَّحمٰنِ الرحیم

क़र्ज़ की अदाएगी (क़र्ज़ चुकाना) में बिला वजह (बिना किसी कारण के) ताख़ीर (देरी) करना गुनाह है
ध्यान दें :-
अगर क़र्ज़दार क़र्ज़ अदा कर सकता है तो क़र्ज़ख़्वाह (जिससे क़र्ज़ लिया है) की मर्ज़ी के बग़ैर एक घड़ी भर भी अगर देर करेगा तो गुनहगार होगा, चाहे नमाज़ में हो, रोज़े की हालत में हो सो रहा हो उसके ज़िम्मे गुनाह लिखा जाता रहेगा

जल्दी क़र्ज़ अदा करने के फ़ायदे :-
1) क़र्ज़दार गुनाह से बच जाएगा
2) जब आप क़र्ज़ख़्वाह (जिससे क़र्ज़ लिया है) को वक़्त पे और जल्दी पैसे लौटाते हैं तो वो दोबारा क़र्ज़ देने को तैयार हो जाता है
आदि..
हवाला 📖
फैज़ाने सुन्नत

Published by husainfoundation374

सुन्नी हनफ़ी अहले सुन्नत वल जमात मसलके आला हजरत

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