गैर मुस्लिमों के त्यौहार में शरीक होना कैसा है ???

सिर्फ दिखावे के लिए भी मंदिर में पूजा पाठ मिन्नत व समाजत करना कुफ्र है

शारहे बुखारी मुफ्ती शरीफुल हक अमजदी फतावा शारहेे बुखारी कीताबुल अकाइद जिल्द 2 पेज 615 में ऐसे ही एक सवाल के जवाब में फरमाते हैं :- ज़ैद अपने इस काम की वजह से काफिर और मुरतद हो गया इस्लाम से खारिज हो गया “”इसी तरह जो मुसलमान बनने वाले एकटर्स फिल्मी तमाशों में करते हैं वो भी इस काम की वजह से काफिरो मुरतद हो गए

हवाला
फतावा बुखारी किताबुल अकाइद जिल्द 2 पेज 614

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💛 :-: गैर मुस्लिमों के मजहबी जलसे व जुलूस में तमाशाई बनकर शरीक होना हराम हराम और सख़्त हराम और गुनाह है शरीक होने वाले पर तौबा करना फ़र्ज़ है

🔴✍गैर मुस्लिमों का ऐसा जल्सा व जुलूस जो कुफ्र के एलान और इज़हार के लिए हो वो लअनत की जगह है और लअनत की जगह से बचना भी बहुत ज़रूरी है,,,
कुफ्फार के मजमअ में रहना और उन के कुफ्रियात को देखना मुसलमान के लिए ज़िल्लत है

🔴 हराम 👈 इसे एक बार भी करना गुनाहे कबीरा (बड़ा गुनाह) है और हराम काम से बचना फ़र्ज़ है ,

🔴 खबरदार 👉 अगर उन गैर मुस्लिमों के धार्मिक जल्सा व जुलूस में उन का जत्था बढ़ाने उन की शान और शौकत बढ़ाने की लिए शरीक हुवे या उन के कुफ्री कामों को अच्छा जाना तो कुफ्र है ,

हवाला
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फतावा मुस्तफविया हुज़ूर मुफ्तिए आज़म हिंद पेज 96 ,,,,

फतावा शारहे बुखारी कीताबुल अकाईद जिल्द 2 पेज 536 और 543 और 537,,,,,,,,
जन्नती ज़ेवर पेज 163

Published by husainfoundation374

सुन्नी हनफ़ी अहले सुन्नत वल जमात मसलके आला हजरत

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