आओ मिलकर मदद करे मुसलमानों की

इसे पढ़ने वाला ख़ुशनसीब ही होगा
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राहे ख़ुदा में ख़र्च करने के बारे क़ुरआन की आयते मुबारका
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“तुम हरगिज़ भलाई को न पहुँचोगे जब तक राहे ख़ुदा में अपनी प्यारी चीज़ ना खर्च करो और तुम जो कुछ ख़र्च करो अल्लाह को मालूम है”
(सुरः आले इमरान आयत नं.92)

“हज़रत अबु तल्हा अंसारी मदीने में बड़े मालदार थे उन्हें अपनी चीज़ों में बयरूहा बाग़ (एक बाग़ का नाम है) बहुत पसदं था जब ये आयत नाज़िल हुई तो आपने बारगाहे रिसालत में खड़े होकर अर्ज़ की : मुझे अपने अमवाल में बाग़ सबसे प्यारा है मैं इसी को राहे ख़ुदा में सदक़ा करता हूँ हुज़ूरे अक़दस ने इस पर मुसर्रत (ख़ुशी) का इज़हार फ़रमाया”
(सही बुख़ारी और मुस्लिम शरीफ़)

हर इंसान को कोई ना कोई चीज़ बहुत प्यारी होती है किसी को दिरहमो दिनार (माल), किसी को औलाद, किसी को बीवी, किसी को कपड़े, किसी को खाने की कोई चीज़, तो किसी को और कुछ, इस आयते मुबारका का जो दूसरा हिस्सा है “और तुम जो कुछ ख़र्च करो अल्लाह को मालूम है” इसके तहत फ़रमाया गया है की “बेशक़ अल्लाह पाक जानता है की तुम उसकी राह में उम्दा, नफ़ीस और अपनी पसंदीदा चीज़ ख़र्च कर रहे हो
या रद्दी, नागवारा, ना पसंदीदा चीज़ ख़र्च कर रहे हो, तो जैसी चीज़ तुम ख़र्च करोगे उसी के मुताबिक़ अल्लाह तुम्हें जज़ा (बदला) अता फ़रमाएगा”

असरा फाउंडेशन धमतरी (छ. ग.) आपसे मोअद्दबाना गुज़ारिश करती है कि अल्लाहो रसूल को राज़ी करने के लिए और दोनों जहाँ में बेहतरीन अज्र हासिल करने के लिए आप अपना प्यारा और क़ीमती माल फाउंडेशन को ज़्यादा से ज़्यादा डोनेट करें

नोट : अपनी क़ीमती ज़कात, सदक़ात, डोनेशन (₹365,₹500,₹1000) देने के लिए इस नंबर पर राब्ता क़ाइम करे
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इस खैर के काम मे कोई कमीशन नही है इस लिए ज्यादा से ज्यादा जकात सदका इसाले सवाब भेजे जिससे जरूरत मंदो की मदद जारी रहे

Published by husainfoundation374

सुन्नी हनफ़ी अहले सुन्नत वल जमात मसलके आला हजरत

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