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दरूद शरीफ का बयान
हज़रत जमाल रज़ा खान क़ादरी स्टेटस यूट्यूब चैनल Voice of Jamal e millat – flow kre
नमाज़ के मसायल
ख़िलाफ़ औला व मकरूहे तन्ज़ीही
मकरूहे तन्ज़ीही : – जिसका करना शरीअत को पसंद नहीं मगर इस हद तक नहीं कि उस पर अज़ाब की वईद आये यह सुन्नते ग़ैर मुअक्किदा के मुकाबिल है । ख़िलाफ़ औला – वह कि जिसका न करना बेहतर था अगर किया तो कुछ हरज और अजाब नहीं । यह मुस्तहब का मुकाबिल है ।Continue reading “ख़िलाफ़ औला व मकरूहे तन्ज़ीही”
मकरूहे तहरीमी व इसाअत
मकरूहे तहरीमी : – यह वाजिब का मुकाबिल है । इसके करने से इबादत नाकिस यानी अधूरी हो जाती है और करने वाला गुनाहगार होता है अगरचे इसका गुनाह हराम से कम है और चन्द बार इसका करना गुनाहे कबीरा है । : इसाअत जिसका करना बुरा और कभी कभी करने वाला इताबे इलाही काContinue reading “मकरूहे तहरीमी व इसाअत”
मुस्तहब व मुबाह
मुस्तहब : – वह कि शरीअत की नज़र में उसका करना पसन्द हो मगर उसके छोड़ने पर कुछ नापसन्दी न हो चाहे हुजूर अकदस सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने उसे किया या करने के लिये फ़रमाया या आंलिमों ने पसंद किया हो अगरचे उसका ज़िक हदीस में न आया हो फिर भी उसका करना औरContinue reading “मुस्तहब व मुबाह”
सुन्नते गैर मुअक्कदा
सुन्नते गैर मुअक्कदा : – वह है कि शरीअत की नज़र में ऐसी चीज़ हो कि उसके छोड़ने को नापसन्द रखे मगर इस हद तक नहीं कि शरीअत उस पर अज़ाब की वईद फ़रमाये । इस बात से आम है कि हुजूर ने उसको हमेशा किया है या नहीं । उस का करना सवाब औरContinue reading “सुन्नते गैर मुअक्कदा”
सुन्नते मुअक्कदा
सुन्नते मुअक्कदा : – वह जिस को हुजूर अकदस सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने हमेशा किया हो अलबत्ता बयाने जवाज़ ( जाइज़ होने के बयान ) के वास्ते कभी छोड़ भी दिया हो या वह कि उस के करने की ताकीद की हो मगर छोड़ने का रास्ता बिल्कुल बन्द न किया हो इसी सुन्नते मुअक्कदाContinue reading “सुन्नते मुअक्कदा”
हुजुर मुफ्तिये आज़म की जिंदगी 9
हुज़ूर मुफ़्ती आज़म हिन्द का इल्मे ग़ैब और इल्मे ग़ैब की दलील अपनी करामात से दी :- सुल्तानुल मशाइख़ हज़रत सय्यदना ख्वाजा निज़ामुद्दीन औलिया महबूबे इलाही रादियल्लाहु अन्हु के उर्स शरीफ में शिरकत के लिए हुज़ूर मुफ़्ती आज़म हिन्द दिल्ली तशरीफ़ ले गए तो कूचाए जिलान में क़याम किया वहाँ एक बद अक़ीदा मुल्ला आप सेContinue reading “हुजुर मुफ्तिये आज़म की जिंदगी 9”
हुजूर मुफ्तिये आज़म की ज़िंदगी 8
उलमा व सादाते किराम का एहतिराम :- हुज़ूर मुफ्तिए आज़म हिन्द रहमतुल्लाह अलैह को उलमा व सादात किराम का एहतिराम वरसे में मिला था ऐसी वालिहाना अंदाज़ से इन हज़रात की ताज़ीम व तौक़ीर करते थे के इस का बयान करना मुश्किल है | 1979 का वाक़िया है के गर्मी के दोपहर में एक खातून एकContinue reading “हुजूर मुफ्तिये आज़म की ज़िंदगी 8”
हुजूर मुफ्तिये आज़म की ज़िंदगी 7
बारगाहे गौसे आज़म रदियल्लाहु अन्हु में हुज़ूर मुफ्तिए आज़म हिन्द रदियल्लाहु अन्हु की मक़बूलियत :- जनाब अब्दुल क़य्यूम साहब जो हुज़ूर मुफ्तिए आज़मे हिन्द के मुरीद थे एक मर्तबा अपने दोस्त जनाब आशिक़ अली साहब को लेकर हुज़ूर मुफ़्ती आज़म हिन्द की बारगाह में हाज़िर हुए ताके उनको मुरीद करवा दें हज़रत ने बैअत के कलिमातContinue reading “हुजूर मुफ्तिये आज़म की ज़िंदगी 7”
सोने ,चांदी व तिजारत के माल की जकात का बयान 03
मसला : – सोने की निसाब बीस मिस्काल है यअनी साढ़े सात तोले ( 87 ग्राम 480 मिलीग्राम ) और चाँदी को दो सौ दिरहम यअनी साढ़े बावन तोले ( -612 ग्राम 360 मिलीग्राम ) यानी वह तोला जिससे यह राइज रुपया सवा ग्यारह माशे है । सोने चाँदी की ज़कात में वज़न का एअतिबारContinue reading “सोने ,चांदी व तिजारत के माल की जकात का बयान 03”
ईमान व अक़ीदे से ज्यादा अमल को अहमियत देना ???
हमारे काफी अवाम भाई किसी की ज़ाहिरदारी कोई अच्छा काम देखकर उसकी तारीफ करने लगते हैं और (प्रभावित) हो’ जाते हैं जबकि इस्लामी नुक़्तए नज़र से कोई नेकी उस वक़्त तक कारआमद नही जब तक कि उसका ईमान व अक़ीदा दुरूस्त न हो।रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने जब ऐलाने नवुब्बत फ़रमाया था तो पहलेContinue reading “ईमान व अक़ीदे से ज्यादा अमल को अहमियत देना ???”
क्या नापाक रहने से रोजा नहीं होता / टूट जाता है
क्या नापाक रहने से रोज़ा टूट जाता है? ⏬⏬⏬⏬⏬⏬⏬⏬⏬⏬⏬⏬⏬⏬अगर कोई शख्स रोज़ा रखकर दिन में नापाक रहें और इस नापाकी की वजह से उसकी नमाज़ छुटती है तो उसके ऊपर नमाज़ छोड़ने का गुनाहे अज़ीम होगा क्योंकि फ़र्ज़ नमाज़ छोड़ना इस्लाम में बड़ा गुनाह और जहन्नम का रास्ता है । लेकिन इस नापाकीContinue reading “क्या नापाक रहने से रोजा नहीं होता / टूट जाता है”
हदीस क्या हैं ?? हदीस किसे कहते है? हदीस की कितनी किसमे है ?? सबक 7 से 10
Sabaq 7 Sahih Leghairihi . ٭صحیح لغیرہ٭ Puri Tareef Sahih Lezatihi Ki Hogi, Sirf Isme Rawioyn Ke Zabt Me Kami Hogi Yani Jis Riwayat Me Puri Shartein Sahih Lezatihi Ki Ho, Bas Rawi Ke Zabt Me Agar Kami Hai Magar Yeh Kami Dusri Sahih Sanad Ke Support Milne Se Puri Ho Jaaye To Wo SahihContinue reading “हदीस क्या हैं ?? हदीस किसे कहते है? हदीस की कितनी किसमे है ?? सबक 7 से 10”
हदीस क्या है ?? हदीस किसे कहते है?? हदीस की कितनी किस्म है?? सबक 4 से 6 तक
Sabaq 4 ٥ – حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، قَالَ: حَدَّثَنَا ابْنُ عُلَيَّةَ، عَنْ عَبْدِ العَزِيزِ بْنِ صُهَيْبٍ، عَنْ أَنَسٍ، عَنِ النَّبِيِّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، ح وحَدَّثَنَا آدَمُ، قَالَ: حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ أَنَسٍ، قَالَ: قَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ «لاَ يُؤْمِنُ أَحَدُكُمْ، حَتَّى أَكُونَ أَحَبَّ إِلَيْهِ مِنْ وَالِدِهِ وَوَلَدِهِ وَالنَّاسِ أَجْمَعِينَ» ٤Continue reading “हदीस क्या है ?? हदीस किसे कहते है?? हदीस की कितनी किस्म है?? सबक 4 से 6 तक”
बाद तौबा मुरतद और बदमज़हब से निकाह क्या हुकुम है ??जब कोई नाम निहाद सुन्नी किसी मुरतद के यहाँ रिश्ता करना चाहता है तो दुनियादार मौलवी शैतानी फरेब से काम लेता है यानी तौबा कर के निकाह पढ़ा देता है और पैसा लेकर अपना रास्ता पकड़ता है, और तौबा करने वाला मुरतद पहले की तरह ही अपने रास्ते पर रहता हैइस लिए शरीयत का यह हुकुम है कि तौबा के फौरन बाद उससे निकाह नही किया जायेगाबल्कि कुछ दिनों उसे देखा जाएगा कि अपनी तौबा पर क़ायम है या नही ??जैसे कि फ़ासीके मोअलिन तौबा के फौरन बाद इमाम नही बना दिया जाताफतावा रजविया जिल्द 3 सफह 213 में है कि फतावा काज़ी खां फिर फतावा आलमगीरी में है किफ़ासिक़ तौबा कर ले फिर भी उसकी गवाही ना मानी जाएगी जब तक की इतना वक़्त ना गुजर जाये की उसकी तौबा का असर जाहिर होऔर आला हजरत इमाम अहले सुन्नत फ़ाज़िले बरेलवी लिखते है की अमीरुल मोमिनिन हज़रत फारुके आज़म रज़ियल्लाहु अन्हु ने जब “सुबैग” से जिस पर से बवजहे बहस मुतशाबिहात बद मज़हबी का अंदेशा था बाद जरबे शदीद तौबा कर ली । हज़रत अबु मूसा अशअरी रज़ियल्लाहु के पास फरमान भेजा कि “मुसलमान उसके पास ना बैठे” “उसके साथ खरीद व फरोख्त ना करे” ‘बीमार पड़े तो उसकी अयादत को ना जये’ “और मर जाये तो उसके जनाजे में हाज़िर ना हो”बतामिले हुक्मे अहकाम (इस बड़े हुकुम को मानने के साथ) एक मुद्दत तक यही हाल रहा की सौ आदमी बैठे होते और वह आता सब मुतफ़र्रिक ( तितर बितर) हो जातेजब हज़रत अबु मूसा अशअरी ने अर्ज़ी भेजी की अब उसका हाल अच्छा हो गया है तब इज़ाज़त फरमाई , फतावा रजविया जिल्द 3 सफह 213आला हजरत मुज़दिदे दिनों मिल्लत ने इस वाकिये के सबूत में 5 हदीसे को नकल फरमाया हैदेखिये सुबैग यानी आयते मुतशाबिहात के मिसल में बहस किया करता था जबकि वह मुरतद नही था बल्कि उसके बद मज़हब होने का डर था मगर उसके बावजूद हज़रत उमर फारूक रज़ियल्लाहु अन्हु ने तौबा के बाद भी सख्त बायकाट किया जब तक कि इत्मिनान नही हो गयालिहाज़ा मुरतद और बद मज़हब के तौबा करने के बाद बदर्जये औला (जरूर) कई बरस तक देखा जाएगा जब तक उसकी बात चीत और तौर तरीकों से खूब इत्मिनान ना हो जाये की वह अहले सुन्नत व जमात का हो गया तब उसके साथ निकाह किया जाएगा वरना नहीलिहाज़ा जो सख्स मुरतद या मुरतद्दह को तौबा करने के बाद फौरन उनके साथ अपने लड़के लड़की की शादी करे या जो मौलवी निकाह पढे मुसलमानो को चाहिए कि इनका मज़हबी बायकाट करे । ऐसे दुनियादार मौलवी के पीछे नमाज़ ना पढेबहवाला :- बद मजहबो से रिश्तेसफह :-19 व 20लेखक :- मुफ़्ती जलालुद्दीन अहमद अमज़दी
इस्लाही पोस्ट नमाज़ के अहम मसले
📝सवाल अस्र या इशा के फ़र्ज़ों से पहले जो चार रक़अ्त सुन्नत गैर मुअक्क़दह पढ़ी जाती हैं उनके क़अदए ऊला में अत्तहिय्यात के बाद दुरूद शरीफ़ पढ़ना चाहिये या नहीं ? अकसर लोग अत्तहिय्यात पढ़ कर तीसरी रक़अ्त के लिये खड़े हो जाते हैं ?✍🏻जवाब : सुन्नते गैर मुअक्क़दह और नवाफ़िल के क़दए ऊला मेंContinue reading “इस्लाही पोस्ट नमाज़ के अहम मसले”