नमाज़ के अहम मसायल a

इल्मे दिन सीखना हर मुसलमान आकिल बालिग पर फ़र्ज़ है

🌹 بِسمِ اللّٰہِ الرَّحمٰنِ الرحیم،

सवाल,1, अगर किसी ने चार रकात वाली फ़र्ज़ नमाज़ की पहली दो रकात में कीरअत नहीं की तो अब वो क्या करे

🌹 जवाब आखिर की दोनों रकात में किरअत करे और सजदए सहव भी करे

🌹🌹🌹🌹🌹🌹

सवाल2, अगर किसी ने नमाज़ के कादा ए आखीरा में दुरुदे इब्राहिमी नहीं पढ़ी तो नमाज़ होगी या नहीं

🌹 जवाब, नमाज़ हो जाएगी सजदए सहव की भी ज़रूरत नहीं.

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सब से पहले कब्र में कौन दफन हुआ, और कयामत में जहन्नुम का लिबास सब से पहले किसे पहनाया जाएगा

इल्मे दिन सीखना हर मुसलमान आकिल बालिग पे फ़र्ज़ है

🗂 सवाल, कियामत के दिन सब से पहले जहन्नम का लिबास किस को पहनाया जाएगा

जवाब ,,कियामत के दिन सब से पहले इबलीस को जहन्नम का लिबास पहनाया जाएगा

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🗂 सवाल, सब से पहले कब्र में कौन दफ्न हुआ

जवाब, सब से पहले कब्र में हज़रत आदम के साहबजादे हाबिल दफ्न हुवे मखज़ने

मालूमात पेज 158

तलाक दी गयी औरत के इद्दत के मसायल

इल्मे दिन सीखना हर मुसलमान पर फ़र्ज़ है*

بِسمِ اللّٰہِ الرَّحمٰنِ الرحیم،،

सवाल,1, तलाक दी गई औरत अगर हामिला,55 साल की,और नाबालिगा ना हो तो उस की इद्दत कितने दिन है

🌹 जवाब, B, जिसे तलाक दी गई वो औरत अगर हामीला (प्रेगनेंट) या 55 साल की और नाबालिग नहीं हो तो उस की इद्दत 3 हैज़ है

यानी तलाक के बाद 3 हैज़ आने तक इद्दत गुजारना है

🌹 ध्यान दें🔴👉 आम लोगों में जो ये मशहूर है के जिसे तलाक दी गई उस की इद्दत 3 महीने 13 दिन है ये गलत है,

हवाला
फतावा फकीहे मिल्लत जिल्द अव्वल पेज 373
बहारे शरियत जिल्द 8
कानूने शरियत

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मय्यत को सवाब पहुचने का बयान

🌻 بِسمِ اللّٰہِ الرَّحمٰنِ الرحیم

तीजा और दसवा बिस्वा चालीसवाँ बरसी 👈 इन दिनों के अलावा भी मय्यत या मरहूम को सवाब पहुँचता है |

🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻

मय्यत को सवाब पहुँचाने के लिए पानी बेहतरीन सदक़ा है की कुआँ खुदवाकर या नल लगवाकर या सबील लगाकर या बोर करवाकर इसका सवाब मय्यत को बख़्शा जाए |

हवाला 📚
जन्नती ज़ेवर

🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻

कर्ज़ की अदायगी में जानबूझकर देरी करना कैसा है ??

🌻 بِسمِ اللّٰہِ الرَّحمٰنِ الرحیم

क़र्ज़ की अदाएगी (क़र्ज़ चुकाना) में बिला वजह (बिना किसी कारण के) ताख़ीर (देरी) करना गुनाह है
ध्यान दें :-
अगर क़र्ज़दार क़र्ज़ अदा कर सकता है तो क़र्ज़ख़्वाह (जिससे क़र्ज़ लिया है) की मर्ज़ी के बग़ैर एक घड़ी भर भी अगर देर करेगा तो गुनहगार होगा, चाहे नमाज़ में हो, रोज़े की हालत में हो सो रहा हो उसके ज़िम्मे गुनाह लिखा जाता रहेगा

जल्दी क़र्ज़ अदा करने के फ़ायदे :-
1) क़र्ज़दार गुनाह से बच जाएगा
2) जब आप क़र्ज़ख़्वाह (जिससे क़र्ज़ लिया है) को वक़्त पे और जल्दी पैसे लौटाते हैं तो वो दोबारा क़र्ज़ देने को तैयार हो जाता है
आदि..
हवाला 📖
फैज़ाने सुन्नत

नगीनो (पथ्थर) की तासीर व पर्दे के अहकाम और सितारों का बयान

📘 सवाल,1, , क्या नगीनों की कोई तासीर होती है

🛢 जवाब,,, जी नहीं कोई भी तासीर नहीं होती

🚤 👉 आदमी के नामों से पत्थरों का हिसाब किताब निकालना ये सिर्फ पैसे कमाने का फन है ,,, इस के अलावा ये कहना के फुलां पत्थर पहनने से आदमी फलता फूलता है मालदार बन जाता है ,,यू सब बे बुनियाद बातें हैं, हकीकत से इस का कोई तअल्लुक नहीं, अंगूठी में कितना ही शानदार और कीमती पत्थर आप लें इस से किस्मत नहीं बदलती

सवाल,2, क्या मुंह बोले भाई बहन का पर्दा है

🧿 जवाब,,जी हां उन से भी पर्दा है,,,
क्यूंकि किसी को बाप,भाई,या मुंह बोला बेटा बना लेने से वो हकीकी भाई,बाप,बेटा नहीं जाता इन से तो निकाह भी जाइज़ (सही) है

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📘 सवाल, 3 , सितारे कहां है

🧿 जवाब,,, ज़मीन और आसमान के दरमियान ज़ंजीरों में लटकी हुई किंदिलों के अंदर है,और ये ज़ंजीर फरिश्तों के हाथ में है

मखजने मालूमात पेज 99
पर्दे के बार में सवाल जवाब 68
200 सवाल के जवाब पेज 63

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सास बहू के झगड़ों का हल

🌻 بِسمِ اللّٰہِ الرَّحمٰنِ الرحیم

📔 सास और बहु के बिच के झगड़े को ऐसे ख़त्म किया जा सकता 👇👇👇

सास का कर्तव्य 👇👇
1) अपनी बहु को बेटी ही समझे और प्यार मोहब्बत से पेश आए
2) जब कोई गलती बहु से हो जाए तो बहु को सुनाने और कोसने की बजाए उसको प्यार से समझाए
3) लोगों के सामने बहु को ज़लील ना करे और नाहीं डाटे, इस्लाह (समझाना) अकेले में करे

बहु का कर्तव्य 👇👇
1) सास को अपनी मां ही समझे और इज़्ज़त करे अगर सास कुछ बोल भी दे तो सब्र करके सुन ले, क्योंकि मज़हबे इस्लाम में सब्र करने पर और इज़्ज़त करने पर भी सवाब मिलता है
2) ससुराल वालों की ख़िदमत करे और उनकी इज़्ज़त करे
3) अलग रहने का ख्याल दिमाग से निकाल दे क्योंकि जॉइंट फैमिली के बहुत से फायदे हैं (सुरक्षा, बच्चों की देखभाल, सुख दुःख में साथ आदि)
4) कोई भी काम करने के पहले घर वालों को बता दे और परमिशन ले ले

बेटे का कर्तव्य 👇👇
1) बेटे को चाहिए की शादी के बाद भी माँ बाप को उतना ही वक़्त और सम्मान दे जितना पहले दिया करता था
2) कभी भी बीवी को माँ के सामने ना डाटे
3) कभी भी माँ को बीवी के सामने ना झिड़के
4) बीवी माँ बाप और घर वालों की ज़रूरत पूरी करे और केयर मोहब्बत करे और उनको वक़्त दे
हवाला 📖
जन्नती ज़ेवर

हराम के माल से सदका करना कैसा है ,वो कौन से परिंदा है जो जमीन के नीचे पानी की खबर देता है

🌹 हराम माल से किया गया सदका कुबूल नहीं होता,बल्कि ऐसा करने वाला गुनहगार होगा और अगर सवाब की नियत से खर्च किया तो कुफ्र है

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🌹👉हुदहुद एक मशहूर परिंदा है जिस के बदन पर अलग अलग रंग की धारियां होती हैं उस के सर पर ताज होता है ,, ये फितरतन बदबूदार और बदबू पसंद होता है ये अपना घोंसला गंदी जगहों पर बनाता है
🌹👉👉 अहले अरब इस के बारे में कहते हैं के ये ज़मीन के नीचे पानी को इस तरह देखता है जिस तरह इंसान गिलास के अंदर पानी देख लेता है
🌹👉 हज़रत सुलेमान अलैहिस्सलाम को ये पानी के बारे में खबर देता था
🌹👉 वो हुदहुद ही है जिस ने हज़रत सुलेमान अलैहिस्सलाम को ये खबर दी थी के यमन की हुक्मरान एक औरत है

हवाला
हयातुल हैवान पेज 690
मखजने मालूमात पेज 89
क्या आप को मालूम है पेज 136

काफिर को काफिर नही कहना चाहिए कहना कैसा ???

🌹 بِسمِ اللّٰہِ الرَّحمٰنِ الرحیم

ये कहना के काफिर को काफिर ना कहो ,ये सरीह (साफ) कुफ्र है ,,,काफिर को काफिर कहना ज़रूरियाते दीन से है
👉 जो शख्स ये कहता है के काफिर को काफिर ना कहो वो खुद काफिर है,,, इस पर तमाम कलीमा पढ़ने वाले फिर्कों का इत्तेफाक है के “काफिर को काफिर ही कहना चाहिए” बल्कि काफिर को काफिर कहना ज़रूरी है

❤👉 यहां तक के उलेमा ए किराम ने कहा लिखा के “”काफिर के कुफ्र में,उस के अज़ाब के हकदार होने शक करने वाला काफिर है

क़ुरआन मजीद में जगह जगह काफिरों को काफिर कहकर ही खिताब किया गया है
قل یایھا الکافرون
फरमा दो ए काफिरों

❤👉 इस आयत में قل अम्र है इस का मतलब ये हुआ के हुज़ूर صلی اللہ علیہ وسلم को हुक्म दिया गया के काफिरों को ए काफिरों कहकर खिताब करो,,

हवाला

फतावा शारहे बुखारी जिल्द 2 पेज 424

औरतों का बुरखा नकाब डिजाइनवाला तड़क भड़क वाला जिस्म से चिपक हुआ पहन कर कहि जाना कैसा है ??


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📕 जवाब, B, :- नहीं जा सकती, क्यूंकि इस में सरासर फित्ना है जितना पुर कशिश और डिज़ाईन वाला निकाब होगा उतना ही ज़्यादा फित्ना होने का इमकान होता है
🌹👉 हकिमुल उम्मत हज़रत हज़रत मुफ्ती अहमद यार खां फरमाते हैं “औरत पर ज़रूरी है के लीबासे फाखिरा या उम्दा बुर्का ओढ़कर बाहर ना जाए क्यूंकि भढ़कदर बुर्का पर्दा नहीं बल्कि ज़ीनत है”

🌹 बुर्का कैसा हो 👉 मोटे कपड़े का ढीला ढाला सादा सा बुर्का हो “जिस को पहनने वाली के बारे में अंदाज़ा लगाना दुशवार हो जाए के जवान है या बूढ़ी

हवाला
दिलचस्प मालूमात पेज 35,,, पर्दे के बारे में सवाल जवाब पेज 185,,,,पर्दे के बारे में सवाल जवाब पेज 275

एक शख्स का ये कहना कि तेरे पीर से मेरा पीर अच्छा ,कहना कैसा है

🌻 بِسمِ اللّٰہِ الرَّحمٰنِ الرحیم

एक शख्स का दूसरे शख़्स से ये कहना की

हमारे पीर तुम्हारे पीर से ज़्यादा अच्छे हैं
या
हमारा सिलसिला तुम्हारे सिलसिले से बेहतर है
या
हमारे पीर के मुरीद (Followers) ज़्यादा हैं और तुम्हारे पीर के कम

या
हमारे पीर का ख़ानदान तुम्हारे पीर के ख़ानदान से बढ़ चढ़ कर है

👈 ये सब कहना ग़लत और बहुत बुरा है क्योंकि इससे दिल में अँधेरा पैदा होता है और फ़ित्ना फ़साद, झगड़े, मन मुटाव, दिल आज़ारी होने का डर है

हर मुरीद के लिए ये ज़रूरी है की दूसरे बुजुर्गों या दूसरे सिलसिले की शान में गुस्ताख़ी और बेअदबी ना करे और जो शख़्स शान में गुस्ताख़ी और बेअदबी करता हो और आप उसको समझा सकते हैं तो समझा दें और ना माने तो उससे दूर हो जाएं

हवाला 📚
जन्नती ज़ेवर

🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻

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फ़ासिक़ , गुनहगार को पीर बनाना कैसा है??

🌻 بِسمِ اللّٰہِ الرَّحمٰنِ الرحیم

💛 الحمدللہ رب العالمین،اللہم صل علی سیدنا محمد

इल्मे दिन सीखना मुसलमान पर फ़र्ज़ है

फ़ासिक़ (गुनहगार) और बद अक़ीदा (जिसका अक़ीदा {मान्यता} सही ना हो) को अपना पीर बनाना हराम है
यदि पीर बद अक़ीदा हो जाए या बड़े गुनाहों (कबीरा गुनाहों) पर अड़ा रहे (करता रहे) तो हमें मुरीदी तोड़ देनी चाहिए

नोट:-
आज कल कुछ ऐसे मक्कार धोके बाज़ फर्जी पीर मार्केट में हैं जो ये कहते हैं की शरीअत का रास्ता और है और फ़क़ीरी का रास्ता, और ये फर्जी पीर शरीअत के ख़िलाफ़ चला करते हैं
👆👆लिहाज़ा इनसे दूर रहें
और अगर ऐसे बाबा या फर्जी पीर से कोई चमत्कार दिखे तो समझ जाएं की ये जादू या नज़रबंद है

सवाल – पीर कैसा होना चाहिए?
जवाब- पीर शरीअत पे चलने वाला होना चाहिए जो नमाज़ रोज़ा का पाबंद हो और अपने मुरीदों को भी शरीअत पे चलने की ताकीद करे और तमाम फ़ितनो और झगड़ों से ख़ुद दूर रहे और अपने मुरीदों को भी दूर रहने की ताकीद करे

हवाला 📚
जन्नती ज़ेवर

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इस्लाही मालूमात (इल्मे दिन सीखना फ़र्ज़ है)

بِسمِ اللّٰہِ الرَّحمٰنِ الرحیم

📕 👉 किसी भी झुटी बात पर अल्लाह को गवाह बनाना या झुटी बात पर जान बूझकर ये कहना के “अल्लाह जानता है” ये कलिमए कुफ्र है

👉 फुकाहा केराम फरमाते हैं ;- जो शख्स कहे अल्लाह जानता है के ये काम मैंने किया है ,हालांकि वो काम उस ने नहीं किया तो उस ने कुफ्र किया
(कुफ्रिया कलिमात के बारे में सवाल जवाब)

🌸🌸🌸🌸🌸🌸

📕 👉 सुवर का नाम लेने से ज़ुबान नापाक नहीं होती, जो लोग कहते हैं के सुवर का नाम लेने से ज़ुबान 40 दिन तक नापाक रहती है ,वो जाहिल और गंवार है
इस्लाही मालूमात 20

🌸🌸🌸🌸🌸🌸

📕👉 गाली देने या अपना या दूसरे का घुटना देखने या सुवर का नाम लेने से वूज़ू नहीं टूटता,,

हां दूसरों के सामने घुटना और सतर खोलना हराम है

इस्लाही मालूमात 20

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जुलूस में नात शरीफ के अहकाम

🌻 بِسمِ اللّٰہِ الرَّحمٰنِ الرحیم

💛 الحمدللہ رب العالمین،اللہم صل علی سیدنا محمد
🌟🌟 जवाब 🌟🌟

📔 जवाब 1) {A} जुलूस में औऱत द्वारा पढ़ी गई नात *नहीं चलाना चाहिए *
जुलूस में बेशक नात चलाइये मगर धीमी आवाज़ में की ताकि इबादत करने वाले को सोने वाले को और मरीज़ वग़ैरह को तकलीफ़ ना हो

नोट:-
मर्द जमाअत का ख़ास ध्यान रखें

🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻

📔 जवाब 2) {A} जश्ने विलादत की ख़ुशी में बाज़ (कुछ) जगह गाने बाजे बजाए जाते हैं ऐसा करना गुनाह है

हवाला 📚
सुब्हे बहारां

गैर मुस्लिमों के त्यौहार में शरीक होना कैसा है ???

सिर्फ दिखावे के लिए भी मंदिर में पूजा पाठ मिन्नत व समाजत करना कुफ्र है

शारहे बुखारी मुफ्ती शरीफुल हक अमजदी फतावा शारहेे बुखारी कीताबुल अकाइद जिल्द 2 पेज 615 में ऐसे ही एक सवाल के जवाब में फरमाते हैं :- ज़ैद अपने इस काम की वजह से काफिर और मुरतद हो गया इस्लाम से खारिज हो गया “”इसी तरह जो मुसलमान बनने वाले एकटर्स फिल्मी तमाशों में करते हैं वो भी इस काम की वजह से काफिरो मुरतद हो गए

हवाला
फतावा बुखारी किताबुल अकाइद जिल्द 2 पेज 614

🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻

💛 :-: गैर मुस्लिमों के मजहबी जलसे व जुलूस में तमाशाई बनकर शरीक होना हराम हराम और सख़्त हराम और गुनाह है शरीक होने वाले पर तौबा करना फ़र्ज़ है

🔴✍गैर मुस्लिमों का ऐसा जल्सा व जुलूस जो कुफ्र के एलान और इज़हार के लिए हो वो लअनत की जगह है और लअनत की जगह से बचना भी बहुत ज़रूरी है,,,
कुफ्फार के मजमअ में रहना और उन के कुफ्रियात को देखना मुसलमान के लिए ज़िल्लत है

🔴 हराम 👈 इसे एक बार भी करना गुनाहे कबीरा (बड़ा गुनाह) है और हराम काम से बचना फ़र्ज़ है ,

🔴 खबरदार 👉 अगर उन गैर मुस्लिमों के धार्मिक जल्सा व जुलूस में उन का जत्था बढ़ाने उन की शान और शौकत बढ़ाने की लिए शरीक हुवे या उन के कुफ्री कामों को अच्छा जाना तो कुफ्र है ,

हवाला
👇👇👇👇👇👇👇
फतावा मुस्तफविया हुज़ूर मुफ्तिए आज़म हिंद पेज 96 ,,,,

फतावा शारहे बुखारी कीताबुल अकाईद जिल्द 2 पेज 536 और 543 और 537,,,,,,,,
जन्नती ज़ेवर पेज 163

सलाम के आदाब

🌹 بِسمِ اللّٰہِ الرَّحمٰنِ الرحیم 🌹

الحمدللہ رب العالمین والصلوۃ و السلم علی سیید المرسلین

👇👇👇👇👇👇👇👇

📗 )👉 खाना खाने वाले को किसी ने सलाम किया, और खाने वाले के मुँह में उस वक़्त लुक़्मा (निवाला) नहीं है तो वो जवाब दे दे

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

🌹 👉 सलाम करते वक़्त हद्दे रुकू तक (इतना झुकना की हाथ बढ़ाए तो घुटनों तक पहुँच जाए) झुक जाना हराम है और अगर इससे कम झुके तो मकरूह
बदक़िस्मती आजकल आमतौर पर सलाम करते वक़्त लोग झुक जाते हैं
नोट :-
किसी बुज़ुर्ग के हाथ चूमते वक़्त झुकने में हर्ज नहीं (झुक सकते हैं) क्योंकि बिग़ैर झुके ये मुमकिन नहीं है

हवाला 📚
फैज़ाने सुन्नत

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जूते चप्पल व कपड़े के कलर के मुत्तालिक बयान

*🌹بسم الله الرحمن الرحيم 🌹** `*``🌹🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ🌹*🌹
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✍🏻सवाल 1)👉कहा जाता है कि काले जूते पहनने से गम आता है ,क्या ये सही है

🌹 जवाब , 👉 हज़रत सैय्यीदुना अब्दुल्लाह बिन ज़ुबैर और यहया बिन कसीर ने सियाह (काले) जूते पहनने से मना फ़रमाया क्यूंकि ये गम का बाईस (वजह) होते हैं (तफसीरे कुरतबी जिल्द पेज 363,)

🔮👉 हुज़ूर सैय्यीदी आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा फाज़ीले बरेलीवी फरमाते हैं कि “”सियाह (काला) जूता गम लाता है””। (हयाते आला हज़रत)


✍🏻सवाल 2)👉क्या पीली चप्पल पहनने से गम में कमी होती है

🌹 जवाब “” 👉 पीले रंग का जूता इस्तेमाल करने में हिक्मत ये है के इस से गमों में कमी आती है जबकि सियाह जूते गम की वजह होते हैं

अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त पारा 1 में इरशाद फ़रमाता है

🌹 انّھا بقرۃ صفرآء فاقع لو نھا تسر الناظرین
तर्जमा 👉 एक “”पीली”” गाय जिस की रंगत डहडहाती देखने वालों को खुशी देती

डहडहाती 👉 यानी बहुत शोख और भड़कीला रंग

💛 👉 तफसीरे रुहुल मआनी में इस आयत के तहत हैं :- जम्हुर (बहुत ज़्यादा) मुफ़स्सिरीन इस तरफ इशारा फरमाते हैं कि ज़र्द (यानी पीला) रंग खुशनुमा रंगों में से है इसी वजह से हज़रत अली पीले रंग का जूता पहनने का मशवरा देते हुवे फरमाते हैं “जिस ने पीले रंग का जूता पहना उस के गम कम होंगे
(रुहूल मआनी जिल्द 1 पेज 396)

💛 👉 हुज़ूर आला हज़रत फाजीले बरेलवी फरमाते हैं :- पीला रंग खुशी लाता है
(हयाते आला हज़रत )


✍🏻सवाल 3 )👉 काले कपड़ा पहनना सही है या नहीं

जवाब👉 काले कपड़े पहनना सही है (बहारे शरीयत 16 पेज 47)

बहुत से लोगों में ये गलत फहमी होती है के उन के लिए काला कपड़ा अच्छा नहीं है ,,,

🔴👉 इस्लाम में ऐसे किसी “वहम” के लिए कोई जगह नहीं है

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कौन से मरे हुए जानवर खाना जायज है

*🌹بسم الله الرحمن الرحيم 🌹** `*``🌹🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ🌹*🌹
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📓 (1) 👉 इब्ने उमर رضی اللہ عنہ से रिवायत ही के नबिए पाक صلی اللہ علیہ وسلم ने इरशाद फ़रमाया हमारे लिए 2 खून और 2 मुरदार (मरे हुवे जानवर) हलाल (जाइज़) है
👉 2 खून यानी कलेजी और तिल्ली
👉 2 मरे हुवे जानवर यानी मछली और टिड्डी

💚👉 हज़रत जाबिर बिन अब्दुल्लाह से मरवी के हम एक लश्कर में थे हमें बहुत भुक लगी थी दरिया ने मरी हुई एक मछली फेंक दी के वैसी मछली हम ने नहीं देखी हम ने आधे महीने तक उसे खाया जब हम वापस आए तो हुज़ूर صلی اللہ علیہ وسلم की बारगाह में ज़िक्र किया तो आका ने फ़रमाया खाओ अल्लाह ने तुम्हारे लिए रिज्क भेजा है और तुम्हारे पास हो तो हमे भी खिलाओ

📚 हवाला 📚
📓👉 बहारे शरीअत हिस्सा 15 पेज 124/125///// नुरुल इज़ाह पेज 130


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किन परिंदों का बिट हलाल है

📓 कबूतर वगैरा वो परिंदे जो हलाल हैं और ऊंचा उड़ते हैं उन में से किसी ने कपड़े या बदन में “बीट” कर दी तो कपड़ा और बदन पाक रहेगा,

इस लिए के
👇
💚👉 जो परिंदे हलाल हैं और ऊंचा उड़ते हैं जैसे कबूतर ,मैना, मुरगाबी वगैरा ,, इन की बीट पाक है

इसी तरह
👇
💚👉 मछली और पानी के दूसरे जानवरों और खटमल ओर मच्छर का खून का पाक है

इसी तरह
👇
💚👉 गोश्त,तिल्ली,कलेजी में जो खून बाक़ी रह गया वो भी पाक है

📚 हवाला 📚
👉 बहारे शरीअत हिस्सा 2 पेज 85,,,, नुरुल इजाह 130

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मस्ज़िद में कूलर पंखों के अहकाम ??

आजकल कितने लोग हैं जो मस्जिदों में आते हैं तो उन्हे नमाज़ से ज्यादा अपने आराम, चैन व सुकून गर्मी और ठन्डक की फिक्र रहती है अपनी दुकानों, मकानो खेतों और खलिहानों ,काम धन्धों में बडी बडी परेशानियाँ उठा लेने वाले मशक्कतें झेलने वाले जब मस्जिदों में दस पन्द्रह मिनट के लिए नमाज़ पढने आते हैं । और जरा सी परेशानी हो जाए, थोडी सी गर्मी या ठन्डक लग जाए तो बौखला जाते हैं , गोया कि आज लोगो ने मस्जिदों को आरामगाह और मकामें  ऐश व इशरत समझ लिया है ।जहॉ तक शरीअते इस्लामिया ने इजाज़त दी हैं वहा तक आराम उठाने से रोका तो नहीं जा सकता लेकिन कुछ जगह यह देखकर. सख्त तक्लीफ होती है कि मस्जिदों को आवाज़ करने वाले बिजली के पंखों , शोर मचाने वाले कूलर से सजा देते है और जब यह सारे पंखे और कूलर चलते हैं तो मस्जिद में एक शोर व हंगामा होता है । और कभी कभी इमाम की किरअत तकबीरात तक साफ सुनाई नहीं देतीं या इमाम को उन पंखों और कूलरो की वजह से चीख़ कर किरअत व तकबीर की आवाज़ निकालना पड़ती है।

बाज़ जगह तो यह भी देखा गया है कि मस्जिदों में अपने ऐश व आराम की खातिर भारी आवाज़ वाले जनरेटर तक रख दिये जाते है जो सरासर आदाबे मस्जिद के खिलाफ है ।  जहाँ तक बिजली के पंखों और कूलरों का सवाल है तो शुरू में अकाबिर उलमा ने इनको मस्जिद में लगाने को मुतलकन ममनूअ व मकरूह फरमाया था। जैसा कि फतावा रज़विया जिल्द 6 सफहा 384 पर खुद आलाहज़रत इमामे अहलेसुन्न्त मौलाना शाह अहमद रज़ा खां साहब अलैहिर्रहमतु वरिदवान के कलम से इसकी तसरीह मौजूद है । अब बाद में जदीद तहकीक़ात और इब्तिलाए आम की बिना पर अगरचे इनकी इजाज़त दे दी गई लेकिन आवाज़ करने वाले, शोर मचा कर मस्जिदों में हंगामा खड़ा कर देने वाले कूलरों और पंखों को लगाना आदाबे मस्जिद और खुशू व ख़ुज़ू के यकीनन खिलाफ है उनकी इजाज़त हरगिज़ नहीं दी जा सकती ।

निहायत हल्की आवाज़ वाले हाथ के पंखों से ही काम चलाया जाए । कूलरों से मस्जिदों को बचा लेना ही अच्छा है क्योंकि उसमें आमतौर से आवाज़ ज़्यादा होती है न की दर्जनों पंखे और कूलर लगा कर मस्जिदों में शोर मचाया जाए।
भाइयों खुदाए तआला का ख़ौफ़ रखो । खानए खुदा को ऐश व इशरत का मकाम न बनाओ वह नमाज़ व इबादत और तिलावते कुरआन के लिए है जिस्म परवरी के लिए नहीं। नफ़्स को मारने के लिए है नफ़्स को पालने के लिए नहीं । मस्जिदों में आवाज़ करने वाले बिजली के पंखों का हुक्म बयान फरमाते हुए आला हज़रत रदियल्लाहु तआला अन्हु फरमाते है:-
*बेशक मस्जिदों में ऐसी चीज़ का एहदास ममनूअ बल्कि ऐसी जगह नमाज़ पढ़ना मकरुह है।*
(फतावा रज़विया, जिल्द 6, सफहा 386 )
इस जगह आला हज़रत ने दुर्रे मुख्तार की इबारत भी नकल फरमाई है ।
*अगर खाना मौजूद हो और उसकी तरफ रग़बत व ख्वाहिश हो तो ऐसे वक़्त में नमाज़ पढ़ना मकरुह है ऐसे ही हर वह चीज जो नमाज़ की तरफ़ से दिल को फेरे और खुशू में खलल डाले।*

मजीद फरमाते है :- चक्की के पास नमाज़ मकरुह है।* रद्दुल मुहतार में है  *शायद इसकी वजह यह है कि चक्की की आवाज़ दिल को नमाज़ से हटाती है ।*
वह पंखे जो खराब और पुराने हो जाने की वजह से आवाज़ करने लगते हैं उनको दुरुस्त करा लेना चाहिए या मस्जिद से हटा देना चाहिए।

अल्लाहु अकबर देखा आप ने किस तरह हम जाने अनजाने में मस्ज़िद के अहकाम बेहुरमती करते है अल्लाह हम सब को तौफीक अता करे सही तरीके से इस्लाम की तालीम पर अमल कर सके ।

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अल्लाह ने इस आलम में सब से खूबसूरत औऱ हसीन क्या बनाया है??

*🌹بسم الله الرحمن الرحيم 🌹** `*``🌹🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ🌹

🔮 इस दुनिया में अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने सब से ज़्यादा हसीन और खूबसूरत अपने महबूब صلی اللہ علیہ وسلم को बनाया है

खुद मेरे प्यारे आका ने इरशाद फ़रमाया के :- अल्लाह ने मेरा हुस्न लोगों से छुपा रखा है गैरत की वजह से,,, क्यूंकि फ़रमाया “”मै अल्लाह का महबूब हूं और मुहिब (मोहब्बत करने वाले) की गैरत का ये तकाज़ा होता है के उस के महबूब को सिवाए उस के और कोई ना देखे

मेरे प्यारे आका का हुस्न ज़ाहिर नहीं किया गया फिर भी हस्ने मुस्तफा का क्या आलम था आइए मुलाहिजा फरमाइए

🌹👉 हज़रत शैख अब्दुल हक मुहद्दिस देहलवी फरमाए हैं :- हुज़ूर सरे मुबारक से लेकर कदम मुबारक तक बिल्कुल नूर थे, आपके के हुस्न और खूबसूरती को देखने से आंख चौंधिया जाती थीं,प्यारे आका चांद और सूरज की तरह रोशन और चमकदार थे,अगर आप लीबासे बशर में ना होते तो कोई भी आपको नज़र भर कर देख नहीं पाता,
तभी तो किसी ने कहा है
🌹 एक झलक देखने की ताब (ताकत)नहीं आलम में,🌹वो अगर जलवा करें कौन तमाशाई हो

(मदारिजुन्नूबुव्वत जिल्द 1 पेज 109)

💚👉 हज़रत कअब बिन मालिक फरमाते हैं जब हुज़ूर खुश होते तो चेहरए अकदस ऐसा चमकदार हो जाता जैसे “”जैसे के चांद का टुकड़ा”

💚👉 हज़रत आईशा सिद्दीका फरमाती हैं के हुज़ूर का हुस्न निराला था ,जो भी आप की तारीफ करता आप को चौदहवीं रात का चांद कहता (तशबिह)

💚👉 हज़रत अबू हुरैरा फरमाते हैं के मैंने हुज़ूर से ज़्यादा हसीन किसी को नहीं देखा जब मै चेहरए अकदस को देखता तो यूं मालूम होता के “”आफताब (सूरज) चेहरए मुबारक में जारी है (मिश्कात,तिरमिज़ी)

💚👉 हज़रत अम्मार बिन यासिर के पोते ने हज़रत रबिअ से कहा के हुज़ूर का कुछ हुलिया मुबारक बयान कीजिए तो हज़रत रबीअ ने फ़रमाया “”””ए बेटे अगर तू प्यारे आका के हुस्न मुबारक को देखता तो देखते ही पुकार उठता के सूरज निकल रहा है”” (खासाईसे कुबरा)

💚👉 हज़रत इमाम फखरुद्दीन राज़ी फरमाते हैं “”हुज़ूर का चेहरे मुबारक इस कदर नूरानी था के जब उसकी नुरानियत दीवारों पर पड़ती तो वो चमक उठती,,

💚👉 और हज़रत आइश फरमाती हैं :- मै सहरी के वक़्त कुछ सिल रही थी के सुई गिर गई , बड़ी तलाश के बाद भी नहीं मिली , इतने में हुज़ूर तशरीफ़ लाए तो उन के चेहरे मुबारक के नूर की किरणों से सुई मिल गई

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अहले सुन्नत वल जमात मसलके आला हजरत 72 फिरको को गलत क्यो मानता है ???

  • अहले सुन्नत व जमात सुन्नी हनफ़ी मसलके आला हजरत आखिर क्यों 72 फिरको को गलत जानता व मानता है कभी गौर किया है आप ने , नही ना तो आज गौर करे आखिर क्यों अहले सुन्नत व जमात सुन्नी हनफ़ी मसलके आला हजरत और दीगर फिरको में जो दूरी है उसका कारण सिर्फ ये नही की दीगर फिरके सलाम नही पढ़ते, उसका कारण ये नही की वो औलिया की बारगाह में हाज़री नही देते, उसका कारण ये नही की वो फातिहा नियाज नही देते, उसका कारण ये नही की वो 11 वी शरीफ , व कुंडा नही करते है ये सब कारण तो सिर्फ दूरियों को और दूर करने के लिये है तो फिर आखिर क्या है मेन कारण जिसकी वजह से अहले सुन्नत व जमात 72 फिरको का रद्द करती है तो आये देखे उनमे से कुछ जालिम फिरको के अजीजों के अक़ीदे जिसकी वजह से हम बरेलवी इन गुस्ताखे खुद व गुस्ताखे रसूल का रद्द करते है और इन्हें मुसलमान नही समझते है

  • माज़ल्लाह इनके अक़ीदये कुफ्र देखे

  • 1 :- अल्लाह की मक्कारी व धोखे से डरना चाहिए, अल्लाह बन्दों से भी मक्कारी करता है
    किताब : तकवीयतुल ईमान पेज 76 लेखक ,इस्माईल देहलवी अहले हदीस
    तो देखा आप ने किस तरह के बातिल अक़ीदये कुफ्र है इनके

2:- नमाज़ में नबी का खयाल आना गधे के ख्याल से भी बदतर है
किताब : सिराते मुस्तकीम पेज 118 लेखक इस्माईल देहलवी
तो सोचे आप खुद क्या नबी का खयाल नमाज़ के दौरान आना इनकी नज़र में कितना गंदा है
जबकि नमाज़ में क़ुरआन की आयतों पढ़ने पर हुजूर का ज़िक्र मिलेगा ,अत्तहियात पढ़ेंगे तो हुजूर पर सलाम व मेराज के वाकिये खयाल आएगा

3:- उम्मती अमल (नमाज़ ,रोज़ा, हज, जकात ,नफ़्ल )इबादतों में नबी से आगे बढ़ जाता है
किताब :- तहजिरन नास , मौलवी कासिम नानोतवी देवबदी
देखे किस कद्र गुस्ताख़ है ये लोग और इनके मानने वाले और फितना खुद फैलाये और बदनाम बरेलवी को करते है

4- नबी से ज्यादा इल्म शैतान को है जो ज्यादा इल्म नबी का बताए वो मुशरिक है
किताब:- बराहिनुल कातिया पेज 55 खलील अहमद अंबेठी देवबंदी
तो देखा आप ने किस तरह ये बार बार नबी की शान में गुस्ताखी करने से बाज़ नही आते और शैतान को तो इल्म वाला मानते है पर नबी को नही खुद ये मुशरिक है और बरेलवियों को फितना फैलने वाला बोलते है जबकि इनकी इन्ही कुफ़्रिया इबारतों से ये मुशरिक गुस्ताखे रसूल है
और अल्लाह ने क़ुरआन में इर्शाद फरमाया अर रहमानो अलमल क़ुरआन, वाली आयात
मफुम :- पाक है वो जात जिसने इंसानियत की जान मोहम्मद को क़ुरआन सिखया
तो देखे क़ुरआन में हर किस्म का इल्म है और सीखाने वाला अल्लाह सीखने वाले हुजूर फिर भी इन काफिरों को हुजूर के इल्म में शक है यानी अल्लाह के इल्म में शक पर शैतान के इल्म में नही

ये तो सिर्फ कुछ ही कुफ़्रिया अक़ीदे है और इस तरह के सैकड़ो अक़ीदे इनकी किताब में है जिनको पढ़ने के बाद आप इनकी ठुकाई करने का मन करेगा
ये तमाम 72 जमात हमेशा से सुन्नी हनफ़ी बरेलवी लोगो पर फ़ितने का इल्जाम लगती है दरहक़ीक़त हम सुन्नी हनफ़ी बरेलवी इन गुस्ताखे रसूल के ऐसे कुफ़्रिया अक़ीदों का रद्द करते है जिनका क़ुरआन हदीस से कोई लेना देना नही है
अब ये इनके लिखे अक़ीदों को तो सही साबित नही कर सकते तो सुन्नी हनफ़ी बरेलवी को बदनाम करते फिरते है
इनकी एक और हकीकत यह सुन्नी हनफ़ी बरेलवी को शिर्क करने वाला कहते है जबकि हुजुर की हदीस से साबित है कि हुजूर ने इर्शाद फरमाया मफुम मेरे बाद तुमहारे मुतालिक मुझे ये डर नही की तुम शिर्क में मुब्तिला होंगे हुजूर की इस हदीस से साबित है कि हुजूर की उम्मत शिर्क में मुब्तिला नही होगी
फिर इस तरह के फ़ितने क्यो फैलाना शिर्क के फ़र्ज़ी फतवे लगा कर


अब फैसला आप को करना है आप किस तरफ है हक़ की तरफ जिसमे हुजूर की मोहब्बत सिखाई जाती है या ना हक की तरफ जिसमे हुजूर की गुस्ताखी सिखाई जाती है
और याद रखे इस बात को अगर ना हक़ फिरको में आप का कोई सगा भी हो तो मेल जोल ना रखो , कोई रिश्तेदारी नही , कोई सगा नही , जो दुश्मन है अल्लाह का व रसूल का वो मुसलमान का खुला दुश्मन है ओर 73 फिरके को मुसलमान समझने वाले गुमराह व बद्दीन है सिर्फ 1 ही फ़िरक़ा हक़ पर है 72 ना हक पर होंगे जो ऐसा ना माने वो हदीस का गुस्ताख है


इन्ही अक़ीदों वजह से सुन्नी हनफ़ी बरेलवी 72 से अलग रास्ता अपने हुए है जो रास्ता है आलिमो का अम्माये दिन का, वलियों का सहाबियों का ,अहलेबैत का और हुजूर का जिसपर हम अल्लाह की रस्सी को मजबूती से थाम कर रखे हुए है

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