जानकारी


💞💫 फिकही मसाइल 💫💞

🌹 الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ الله ﷺ​ 💎 *آج کا جواب*💎

💎 सवाल,,, रात के वक़्त आईना देखना मना है या नहीं

💫 जवाब, हुज़ूर आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा बरैलवी फतावा राज़विया शरीफ जिल्द 15 पेज 176 में फरमाते हैं :- रात को आइना देखने की कोई मुमानियत नहीं,, कुछ आम लोगों का ख्याल है के इस से मुंह पर झाइयां पड़ती हैं जब की इस का भी कोई सुबूत ना शरअन है ना तबअन ना तजरीबतन,,,

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💫 सवाल,, रुमाल रेशमी मर्द के लिए इस्तेमाल करना यानी हाथ में लेना,जेब में रखना,उस से मुंह पोछना ,, जाइज़ है या नहीं

💎 जवाब,, जाइज़ है
🌹👉 हुज़ूर सैय्यीदी आला हज़रत फतावा रज़विया शरीफ जिल्द 15 पेज 144 में फरमाते हैं :- हाथ में लेना,जेब में रखना,उस से मुंह पूछना ये सब जाइज़ है,, अगर तकब्बुर की नीयत से ना हो,,,

👉 हुज़ूर सदरुशशरीअह अमजद अली 16/47 में फरमाते हैं :- मर्द के लिए रेशम के कपड़े हराम है,

👉आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा फतावा रज़विया शरीफ जिल्द 15 पेज 144 में फरमाते है :- असल ये है कि हमारे इमामे मज़हब के नज़दीक रेशम का पहनना ही मर्द को ममनूअ (मना) है,ना के बाक़ी तरीक़े इस्तेमाल

👉 हुज़ूर सदरुशशरीअह अल्लामा अमजद अली बहारे शरीअत जिल्द 3 हिस्सा 16 पेज 48 में फरमाते हैं :- मर्दों के कपड़ों में रेशम की गोट 4 उंगुल तक की जाइज़ है,इस से ज़्यादा नाजाइज़ है,यानी उस की चौड़ाई 4 ऊंगुल तक हो ,,, ऐसे ही फतावा रज़विया शरीफ जिल्द 15 पेज 144 में है

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नामो से रिसालत पर पहरा

याद रखो मुसलमनो नामो से रिसालत पर पहरा देना हर मुसलमान पर फ़र्ज़ है

माजल्लाह हुजूर की शान पर कोई गलीज गुस्ताखी करे तो उसका विरोध , बायकाट ,उसके खिलाफ लीगल एक्शन लेना हम सब का फर्ज है

अगर हम हुजूर की शान में गुस्ताखी करने वाले के लिए हम सब ये ना करे तो यकीन जान लो हम हलाकी की तरफ है

इमाम मालिक फरमाते है कि हुजूर की शान में गुस्ताखी हो और उम्मत खामोश रहे तो इस उम्मत का जीने का कोई हक नही

امام مالک رضی اللہ عنہ فرماتے ہیں ۔ ۔ ۔
اگر حضور ﷺ کی شان میں گستاخی ہو اور امت خاموش رہے تو اس امت کو جینے کا کوٸی حق نہیں!
مابقا ٕ الامہ بعد شتم نبیہا ﷺ

الشفا : جلد 2 القسم الرابع الباب الاول :-امام قاضی عیاض رضی اللہ عنہ

एक जरुरी इस्लाह

हमे खुद की इस्लाह करनी है पैगाम हुजूर सल्लाहों अलैहि व सल्लम को आगे बढ़ना है इंशाअल्लाह

इस लिए आपस अहले सुन्नत के जितने भी इख्तेतलाफ़ है जैसे माइक पर नमाज़, वीडियो, फोटो, इन पर बहस ना करे ।

इन मसलो पर अपने पीर रहनुमा की पैरोकारी करे ।

सिलसिला नसब पर भी बहस ना करे कि मैं ये मैं वो याद रखें सभी सिलसिला नसब रज़वी,अशरफी,क़ादरी,नक्शबंदी,चिश्ती,औऱ भी सभी सिलसिला नसब आपने आपने पिरो से होते हुए हज़रते गौसे आज़म तक पहुचते है

इस लिए ये बात याद रखे हम सब एक है सिलसिले की बुनियाद पर और अहम बात अक़ीदे की बुनियाद पर।

आज मुसलमान परेशान क्यो ??

आज मुसलमान का परेशान होने का क्या कारण है क्या हमने कभी गौर किया है नही ना

तो आओ आज गौर करे कि आखिर क्यों आज हम परेशान हाल है

आज हमारा परेशान होने का कारण है कि हमने नमाज़,रोज़ा,हज जकात, को दरकिनार कर दिया है जो फ़र्ज़ है

और फ़र्ज़ को छोड़ कर मुस्तहब को फ़र्ज़ से ज्यादा बुनयादी वसूल बना लिया हम दरगाह को जाते है लेकिन मस्ज़िद नही

दरगाह के साथ साथ हमे मस्ज़िद भी जाना चाहिए वालियों का एहसान है हम पर उनके दर पर जाने से हमारे मसले हल होते है लेकिन उन वालियों का पैगाम ही नमाज़ रोज़ हज जकात है

आज हमने हराम हलाल में फ़र्क़ करना छोड़ दिया

आज हम ब्याज पर पैसे दे रहे है जो कि हराम हराम है कहा से बरकत होगी गुनाहों के साथ बला नाज़िल होती है, सवाल ही नही होता कि पैसे रहते हुए भी हम परेशान ना हो जब हराम खाएंगे तो हॉस्पिटल वगैरह के ही चक्कर लगाएंगे ,

हर बीमारी की शिफा सदके से है लेकिन हम किसी को सदका नही देते जब कि हम को सदका देते रहना चाहिए

जकात एक अहम मसला है जिस पर हम को खास ध्यान देना चाहिए लेकिन हम उसमे भी पीछे है

जकात निकलना सवाब तो है ही साथ अपने माल का इस्लामिक इन्श्योरेंस भी है लेकिन हम जकात निकलने में कोताही करते है फिर इस मौलाना उस मौलाना के चक्कर लगाते फिरते है कि हमारा काम मे बरकत नही हो रही है अरे जी होगी भी कहा से जब जकात पूरी ईमानदारी से निकाली ही नही तो बरकत भी माल में कैसे आएगी इस लिए आज से ही अहद कर ले जकात पूरी ईमानदारी से निकले पुरानी जकात अगर बाकी है हिसाब किताब कर उसे जल्द से जल्द अदा करे

हुस्ने सुलूक का दामन हम ने आज छोड़ दिया है

आज हम बिल्कुल भी बे मुरव्वत होते जा रहे है रिश्तेदार की मदद करने की बजाय हम उससे दुश्मनी करते है वो अगर हमारी खिंचते है तो हम भी उनकी खिंचते है गैरो से हमारे लेन देन ठीक नही , हमारी जबान की इस वजह से अब कीमत नही रही, कल तक जो लोग सिर्फ हमारी जबान पर विश्वास करते थे आज लिखापढ़ी पर भी विश्वास नही करते

कारोबार में हम हिसाब किताब नही रखते जब कि ,( अल्लाह का क़ुरआन में इरशाद है जब भी कुछ लेन देन किया करो लिख लिया करो )

गौर फिक्र करे

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