अहले सुन्नत वल जमात मसलके आला हजरत 72 फिरको को गलत क्यो मानता है ???

  • अहले सुन्नत व जमात सुन्नी हनफ़ी मसलके आला हजरत आखिर क्यों 72 फिरको को गलत जानता व मानता है कभी गौर किया है आप ने , नही ना तो आज गौर करे आखिर क्यों अहले सुन्नत व जमात सुन्नी हनफ़ी मसलके आला हजरत और दीगर फिरको में जो दूरी है उसका कारण सिर्फ ये नही की दीगर फिरके सलाम नही पढ़ते, उसका कारण ये नही की वो औलिया की बारगाह में हाज़री नही देते, उसका कारण ये नही की वो फातिहा नियाज नही देते, उसका कारण ये नही की वो 11 वी शरीफ , व कुंडा नही करते है ये सब कारण तो सिर्फ दूरियों को और दूर करने के लिये है तो फिर आखिर क्या है मेन कारण जिसकी वजह से अहले सुन्नत व जमात 72 फिरको का रद्द करती है तो आये देखे उनमे से कुछ जालिम फिरको के अजीजों के अक़ीदे जिसकी वजह से हम बरेलवी इन गुस्ताखे खुद व गुस्ताखे रसूल का रद्द करते है और इन्हें मुसलमान नही समझते है

  • माज़ल्लाह इनके अक़ीदये कुफ्र देखे

  • 1 :- अल्लाह की मक्कारी व धोखे से डरना चाहिए, अल्लाह बन्दों से भी मक्कारी करता है
    किताब : तकवीयतुल ईमान पेज 76 लेखक ,इस्माईल देहलवी अहले हदीस
    तो देखा आप ने किस तरह के बातिल अक़ीदये कुफ्र है इनके

2:- नमाज़ में नबी का खयाल आना गधे के ख्याल से भी बदतर है
किताब : सिराते मुस्तकीम पेज 118 लेखक इस्माईल देहलवी
तो सोचे आप खुद क्या नबी का खयाल नमाज़ के दौरान आना इनकी नज़र में कितना गंदा है
जबकि नमाज़ में क़ुरआन की आयतों पढ़ने पर हुजूर का ज़िक्र मिलेगा ,अत्तहियात पढ़ेंगे तो हुजूर पर सलाम व मेराज के वाकिये खयाल आएगा

3:- उम्मती अमल (नमाज़ ,रोज़ा, हज, जकात ,नफ़्ल )इबादतों में नबी से आगे बढ़ जाता है
किताब :- तहजिरन नास , मौलवी कासिम नानोतवी देवबदी
देखे किस कद्र गुस्ताख़ है ये लोग और इनके मानने वाले और फितना खुद फैलाये और बदनाम बरेलवी को करते है

4- नबी से ज्यादा इल्म शैतान को है जो ज्यादा इल्म नबी का बताए वो मुशरिक है
किताब:- बराहिनुल कातिया पेज 55 खलील अहमद अंबेठी देवबंदी
तो देखा आप ने किस तरह ये बार बार नबी की शान में गुस्ताखी करने से बाज़ नही आते और शैतान को तो इल्म वाला मानते है पर नबी को नही खुद ये मुशरिक है और बरेलवियों को फितना फैलने वाला बोलते है जबकि इनकी इन्ही कुफ़्रिया इबारतों से ये मुशरिक गुस्ताखे रसूल है
और अल्लाह ने क़ुरआन में इर्शाद फरमाया अर रहमानो अलमल क़ुरआन, वाली आयात
मफुम :- पाक है वो जात जिसने इंसानियत की जान मोहम्मद को क़ुरआन सिखया
तो देखे क़ुरआन में हर किस्म का इल्म है और सीखाने वाला अल्लाह सीखने वाले हुजूर फिर भी इन काफिरों को हुजूर के इल्म में शक है यानी अल्लाह के इल्म में शक पर शैतान के इल्म में नही

ये तो सिर्फ कुछ ही कुफ़्रिया अक़ीदे है और इस तरह के सैकड़ो अक़ीदे इनकी किताब में है जिनको पढ़ने के बाद आप इनकी ठुकाई करने का मन करेगा
ये तमाम 72 जमात हमेशा से सुन्नी हनफ़ी बरेलवी लोगो पर फ़ितने का इल्जाम लगती है दरहक़ीक़त हम सुन्नी हनफ़ी बरेलवी इन गुस्ताखे रसूल के ऐसे कुफ़्रिया अक़ीदों का रद्द करते है जिनका क़ुरआन हदीस से कोई लेना देना नही है
अब ये इनके लिखे अक़ीदों को तो सही साबित नही कर सकते तो सुन्नी हनफ़ी बरेलवी को बदनाम करते फिरते है
इनकी एक और हकीकत यह सुन्नी हनफ़ी बरेलवी को शिर्क करने वाला कहते है जबकि हुजुर की हदीस से साबित है कि हुजूर ने इर्शाद फरमाया मफुम मेरे बाद तुमहारे मुतालिक मुझे ये डर नही की तुम शिर्क में मुब्तिला होंगे हुजूर की इस हदीस से साबित है कि हुजूर की उम्मत शिर्क में मुब्तिला नही होगी
फिर इस तरह के फ़ितने क्यो फैलाना शिर्क के फ़र्ज़ी फतवे लगा कर


अब फैसला आप को करना है आप किस तरफ है हक़ की तरफ जिसमे हुजूर की मोहब्बत सिखाई जाती है या ना हक की तरफ जिसमे हुजूर की गुस्ताखी सिखाई जाती है
और याद रखे इस बात को अगर ना हक़ फिरको में आप का कोई सगा भी हो तो मेल जोल ना रखो , कोई रिश्तेदारी नही , कोई सगा नही , जो दुश्मन है अल्लाह का व रसूल का वो मुसलमान का खुला दुश्मन है ओर 73 फिरके को मुसलमान समझने वाले गुमराह व बद्दीन है सिर्फ 1 ही फ़िरक़ा हक़ पर है 72 ना हक पर होंगे जो ऐसा ना माने वो हदीस का गुस्ताख है


इन्ही अक़ीदों वजह से सुन्नी हनफ़ी बरेलवी 72 से अलग रास्ता अपने हुए है जो रास्ता है आलिमो का अम्माये दिन का, वलियों का सहाबियों का ,अहलेबैत का और हुजूर का जिसपर हम अल्लाह की रस्सी को मजबूती से थाम कर रखे हुए है

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Published by husainfoundation374

सुन्नी हनफ़ी अहले सुन्नत वल जमात मसलके आला हजरत

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