
मकरूहे तहरीमी : – यह वाजिब का मुकाबिल है । इसके करने से इबादत नाकिस यानी अधूरी हो जाती है और करने वाला गुनाहगार होता है अगरचे इसका गुनाह हराम से कम है और चन्द बार इसका करना गुनाहे कबीरा है । :
इसाअत जिसका करना बुरा और कभी कभी करने वाला इताबे इलाही का मुस्तहक और बराबर करने वाला अज़ाब का मुस्तहक़ है और यह सुन्नते मुअक्किदा के मुकाबिल है ।
https://youtube.com/channel/UCQ4sfBlQPxYpH7nMmxSQO9g
दीनी मालूमात के लिए हमे फ्लो जरूर करे
यूट्यूब youtube link :-
https://youtube.com/channel/UCQ4sfBlQPxYpH7nMmxSQO9g
फेसबुक facebook link:-
https://www.facebook.com/jamalinoorirazvi/
वेबसाइट website link :-
https://dinitalim.data.blog/
टेलीग्राम telegram link :-
https://t.me/jamlinoori