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ख़िलाफ़ औला व मकरूहे तन्ज़ीही
मकरूहे तन्ज़ीही : – जिसका करना शरीअत को पसंद नहीं मगर इस हद तक नहीं कि उस पर अज़ाब की वईद आये यह सुन्नते ग़ैर मुअक्किदा के मुकाबिल है । ख़िलाफ़ औला – वह कि जिसका न करना बेहतर था अगर किया तो कुछ हरज और अजाब नहीं । यह मुस्तहब का मुकाबिल है ।Continue reading “ख़िलाफ़ औला व मकरूहे तन्ज़ीही”
मकरूहे तहरीमी व इसाअत
मकरूहे तहरीमी : – यह वाजिब का मुकाबिल है । इसके करने से इबादत नाकिस यानी अधूरी हो जाती है और करने वाला गुनाहगार होता है अगरचे इसका गुनाह हराम से कम है और चन्द बार इसका करना गुनाहे कबीरा है । : इसाअत जिसका करना बुरा और कभी कभी करने वाला इताबे इलाही काContinue reading “मकरूहे तहरीमी व इसाअत”
मुस्तहब व मुबाह
मुस्तहब : – वह कि शरीअत की नज़र में उसका करना पसन्द हो मगर उसके छोड़ने पर कुछ नापसन्दी न हो चाहे हुजूर अकदस सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने उसे किया या करने के लिये फ़रमाया या आंलिमों ने पसंद किया हो अगरचे उसका ज़िक हदीस में न आया हो फिर भी उसका करना औरContinue reading “मुस्तहब व मुबाह”
इन्ना अहसनल हदीसे किताबुल्लाही
और ऐ ईमान वालो होशियारी से काम लो ( ७ ) फिर दुश्मन की तरफ़ थोड़े थोड़े होकर निकलो या इकट्ठे चलो (७१) तुम में कोई वह है कि ज़रूर देर लगाएगा ( २ ) फिर अगर तुमपर कोई मुसीबत पड़े तो कहे खुदा का मुझपर एहसान था कि मैं उनके साथ हाज़िर न थाContinue reading “इन्ना अहसनल हदीसे किताबुल्लाही”
मुहर्रम 1 कूफियो के खत
शहर की बुनिया उस वक्त पड़ी जबकि 14 हिजरी से 16 हिं 0 तक कादसिया वगैरा में फुतूहात के बाद मुसलमानों की फौज ने इराक में सुकूनत इख्तियार की और मदाइन की आबो – हवा उन के मुवाफिक न हुई तो सहाबिए रसूल हज़रत सअद बिन वकास रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के हुक्म से यह जगहContinue reading “मुहर्रम 1 कूफियो के खत”
शहीद की कितनी किस्में है ??
शहीद की किस्में शहीद की तीन किस्में हैं : 1- शहीदे हक़ीकी , 2- शहीदे फिकही और 3- शहीदे हुक्मी । 1. जो अल्लाह की राह में कत्ल किया जाए वह शहीदे हकीकी है 2. शहीदे फिकही उसे कहते हैं कि आकिल बालिग मुसलमान जिस पर गुस्ल फर्ज न हो वह तलवार व बंदूक वगैराContinue reading “शहीद की कितनी किस्में है ??”