हुज़ूर मुफ़्ती आज़म हिन्द का इल्मे ग़ैब और इल्मे ग़ैब की दलील अपनी करामात से दी :- सुल्तानुल मशाइख़ हज़रत सय्यदना ख्वाजा निज़ामुद्दीन औलिया महबूबे इलाही रादियल्लाहु अन्हु के उर्स शरीफ में शिरकत के लिए हुज़ूर मुफ़्ती आज़म हिन्द दिल्ली तशरीफ़ ले गए तो कूचाए जिलान में क़याम किया वहाँ एक बद अक़ीदा मुल्ला आप से इल्मे ग़ैब के मसले पर उलझ पड़ा साहिबे खाना जनाब अशफ़ाक़ अहमद ने आप से अदब से गुज़ारिश की के हुज़ूर ये कज बहस है इन पर किसी बात का असर नहीं होता आपने अपने मेज़बान से कहा ये इस वक़्त तुम्हारे घर तशरीफ़ लाए हुए हैं इनके मुतअल्लिक़ तुम्हे कोई सख्त बात न कहना चाहिए ये मौलवी साहब ने आज तक किसी की बात सुनी ही नहीं इसलिए असर भी क़ुबूल नहीं किया | ये तो सिर्फ अपनी बात सुनते रहे हे और वो भी अनसुनी कर दी जाती है आज में इनकी बाते तवज्जोह से सुनुँगा हाज़िरीन भी ख़ामोशी से सुने |
(वो बद अक़ीदा) मौलवी सईदुद्दीन अंबालवी ने सवा घंटे तक ये बात साबित करने की कोशिश की के नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को इल्मे ग़ैब नहीं था जब वो थक हार कर खामोश हो गया तो आपने फ़रमाया के अगर कोई दलील तुम अपने मौक़िफ़ के ताईद में बयान करना भूल गए हो तो याद करलो मौलवी साहब फिर जोशे तक़रीर में आ गए और फिर आधे घंटे तक बोलने के बाद कहा के ये बात अच्छी तरह साबित हो गई के हज़रत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को इल्मे ग़ैब नहीं था | हज़रत ने फ़रमाया तुम अपने बातिल अकीदे से फ़ौरन तौबा कर लो हुज़ूर रसूले करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को अल्लाह तआला ने ग़ैब का इल्म अता फ़रमाया था आप उसके रद में वो सब कुछ कह चुके है जो कह सकते थे अब अगर ज़ेहमत न हो तो मेरे दलाइल भी सुनले |मौलवी साहब ने बरहम हो कर कहा के मेने तुम जैसे लोगो की सारी दलीले सुन रखी है मुझे सब मालूम है तुम क्या कहोगे हज़रत ने बड़े तहम्मुल से कहा मौलवी साहब बेवा माँ के हुक़ूक़ बेटे पर क्या है? उन्होंने कहा के गैर मुतअल्लिक़ सवाल का जवाब नहीं दूंगा तेज़ आवाज़ में कहा हज़रत ने फ़रमाया अच्छा तुम मेरे किसी सवाल का जवाब न देना मेरे चंद सवालात सुन तो लो मेने डेढ़ पोने दो घंटे तक तुम्हारे दलाइल सुन हैं | हज़रत की बात सुन कर मौलवी साहब खामोश हो गए तो आपने दूसरा सवाल किया के क्या किसी से क़र्ज़ ले कर रूपोश हो जाना (भाग जाना) जाइज़ हैं? क्या अपने माज़ूर बेटे की किफ़ालत से दस्तकश हो कर उसे भीक मांगने के लिए छोड़ा जा सकता हैं? क्या हज्जे बदल के इख़राजात (रूपया पैसा वगेरा) ले कर हज….अभी सरकार मुफ़्ती आज़म ने अपना सवाल पूरा भी नहीं किया था के मौलवी साहब ने आगे बढ़ कर क़दम पकड़ते हुए कहा के बस कीजिये हज़रत मसला हल हो गया ये बात आज मेरी समझ में आ गई हैं के रसूले करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को इल्मे ग़ैब हासिल था और रसूले करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास इल्मे ग़ैब होना ही चाहिए वरना मुनाफिक़ीन मुसलमानो की तंज़ीम को बर्बाद कर देते अल्लाह तआला ने जब आपको मेरे मुतअल्लिक़ ऐसी बाते बता दी जो यहाँ कोई नहीं जनता तो बारगाहे अलीम से रसूले करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर क्या इंकिशाफ़ात न होते होंगे? मौलवी साहब उसी वक़्त ताइब हो कर सरकार मुफ़्ती आज़म हिन्द रदियल्लाहु अन्हु से बैअत हो गए |