और ऐ ईमान वालो होशियारी से काम लो ( ७ ) फिर दुश्मन की तरफ़ थोड़े थोड़े होकर निकलो या इकट्ठे चलो (७१)
तुम में कोई वह है कि ज़रूर देर लगाएगा ( २ ) फिर अगर तुमपर कोई मुसीबत पड़े तो कहे खुदा का मुझपर एहसान था कि मैं उनके साथ हाज़िर न था (७२)
और अगर तुम्हें अल्लाह का फ़ज़्ल मिले ( ३ ) तो ज़रूर कहे ( ४ ) गोया तुममें उसमें कोई दोस्ती न थी ऐ काश मैं उनके साथ होता तो बड़ी मुराद पाता ७३ )
तो उन्हें अल्लाह की राह में लड़ना चाहिये जो दुनिया की ज़िन्दगी बेचकर आख़िरत लेते हैं और जो अल्लाह की राह में ( ५ ) लड़े फिर मारा जाए या ग़ालिब ( विजयी ) आए तो जल्द ही हम उसे बड़ा सवाब देंगे ( ७४ )
, और तुम्हें क्या हुआ कि न लड़ो अल्लाह की राह में और कमज़ोर मर्दों और औरतों और बच्चों के वास्ते यह दुआ कर रहे हैं कि ऐ हमारे रब हमें इस बस्ती से निकाल जिसके लोग ज़ालिम हैं और हमें अपने पास से कोई हिमायती दे दे और हमें अपने पास से कोई मददगार दे दे ( ७५ )
ईमान वाले अल्लाह की राह में लड़ते हैं ( ६ ) और काफ़िर शैतान की राह में लड़ते हैं तो शैतान के दोस्तों से ( ७ ) ( लड़ो बेशक शैतान का दाव कमज़ोर है (८){७६}
अल क़ुरआन सुरह निसा आयत 71 से 76