*🌹بسم الله الرحمن الرحيم 🌹** `*``🌹🌹الصــلوة والسلام عليك يارسول اللهﷺ🌹*🌹
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इन सब को ध्यान से गौरो फिक्र से पढ़े । इंशाअल्लाह हम सब की इस्लाह होगी ।
मय्यत के दसवा, बिस्वा,चालीसवाँ वग़ैरह के मौके पर दावत करके खाना खिलाने का जो रिवाज हैं यह भी महज़ गलत और ख़िलाफ़े शरअ हैं, हाँ ग़रीबों और फकीरों को बुलाकर खिलाने में हर्ज नहीं

“आला हज़रत” फरमाते हैं मुर्दे का खाना सिर्फ़ फकीरों के लिए हैं आम दावत के तौर पर जो करते हैं यह मना हैं, ग़नी (मालदार, अमीर) ना खाए
Note :- दसवा, बिस्वा, चालीसवाँ का मकसद मरहूम के लिए सवाब पहुचना व मगफिरत के लिए दुआ करना होना चाहिए
नोट:-
दावत ख़ुशी में होती हैं गम में नहीं
हवाला 📚
ग़लत फ़हमी और उनकी इस्लाह
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