आज मुसलमान परेशान क्यो ??

आज मुसलमान का परेशान होने का क्या कारण है क्या हमने कभी गौर किया है नही ना

तो आओ आज गौर करे कि आखिर क्यों आज हम परेशान हाल है

आज हमारा परेशान होने का कारण है कि हमने नमाज़,रोज़ा,हज जकात, को दरकिनार कर दिया है जो फ़र्ज़ है

और फ़र्ज़ को छोड़ कर मुस्तहब को फ़र्ज़ से ज्यादा बुनयादी वसूल बना लिया हम दरगाह को जाते है लेकिन मस्ज़िद नही

दरगाह के साथ साथ हमे मस्ज़िद भी जाना चाहिए वालियों का एहसान है हम पर उनके दर पर जाने से हमारे मसले हल होते है लेकिन उन वालियों का पैगाम ही नमाज़ रोज़ हज जकात है

आज हमने हराम हलाल में फ़र्क़ करना छोड़ दिया

आज हम ब्याज पर पैसे दे रहे है जो कि हराम हराम है कहा से बरकत होगी गुनाहों के साथ बला नाज़िल होती है, सवाल ही नही होता कि पैसे रहते हुए भी हम परेशान ना हो जब हराम खाएंगे तो हॉस्पिटल वगैरह के ही चक्कर लगाएंगे ,

हर बीमारी की शिफा सदके से है लेकिन हम किसी को सदका नही देते जब कि हम को सदका देते रहना चाहिए

जकात एक अहम मसला है जिस पर हम को खास ध्यान देना चाहिए लेकिन हम उसमे भी पीछे है

जकात निकलना सवाब तो है ही साथ अपने माल का इस्लामिक इन्श्योरेंस भी है लेकिन हम जकात निकलने में कोताही करते है फिर इस मौलाना उस मौलाना के चक्कर लगाते फिरते है कि हमारा काम मे बरकत नही हो रही है अरे जी होगी भी कहा से जब जकात पूरी ईमानदारी से निकाली ही नही तो बरकत भी माल में कैसे आएगी इस लिए आज से ही अहद कर ले जकात पूरी ईमानदारी से निकले पुरानी जकात अगर बाकी है हिसाब किताब कर उसे जल्द से जल्द अदा करे

हुस्ने सुलूक का दामन हम ने आज छोड़ दिया है

आज हम बिल्कुल भी बे मुरव्वत होते जा रहे है रिश्तेदार की मदद करने की बजाय हम उससे दुश्मनी करते है वो अगर हमारी खिंचते है तो हम भी उनकी खिंचते है गैरो से हमारे लेन देन ठीक नही , हमारी जबान की इस वजह से अब कीमत नही रही, कल तक जो लोग सिर्फ हमारी जबान पर विश्वास करते थे आज लिखापढ़ी पर भी विश्वास नही करते

कारोबार में हम हिसाब किताब नही रखते जब कि ,( अल्लाह का क़ुरआन में इरशाद है जब भी कुछ लेन देन किया करो लिख लिया करो )

गौर फिक्र करे

Published by husainfoundation374

सुन्नी हनफ़ी अहले सुन्नत वल जमात मसलके आला हजरत

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