अपने माल की पूरी जकात अदा जरूर करे ।
अवाम में कुछ लोग ऐसा ख्याल करते हैं हालांकि यह उनकी गलतफहमी है । माहे रमज़ान में इफ़्तार के वक़्त से सहरी तक रात में जिस तरह खाना पीना जाइज़ है , उसी तरह बीवी और शौहर का हमबिस्तर होना और सुहबत व मुजामअत बिला शक जाइज़ है और बकसरत अहादीस से साबित है बल्कि कुरआन शरीफ में खास इसकी इजाज़त के लिए आयते करीमा नाज़िल फरमाए गई ।
इरशादे बारी तआला है ::-
तर्जमा >तुम्हारे लिए रोज़े की रातों में औरतों से सुहबत हलाल की गई वह तुम्हारे लिए लिबास है तुम उनके लिए लिबास ।
( पारा 2 , रूकू 7)
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