हुजुर मुफ्तिये आज़म 4

#हुजुर_मुफ्तिये_आज़म_की_ज़िंदगी
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ख़लीफ़ए आला हज़रत हज़रत अल्लामा शाह ज़ियाउद्दीन अहमद मदनी रहमतुल्लाह अलैह फरमाते हैं :- हुज़ूर मुफ्तिए आज़म हिन्द वो दर्जाए सिद्दिक़ियत पर फ़ाइज़ हैं |

हज़रत अल्लामा अब्दुल मुस्तफा अज़हरी पाकिस्तान फरमाते हैं :- हुज़ूर मुफ्तिए आज़म हिन्द अमानत दियानत शफ़क़त और तवाज़ो व इंकिसारी का अज़ीम पैकर थे |

हज़रत सय्यद मुख़्तार अशरफ अशरफी जिलानी सज्जादा नशीन किछौछा शरीफ फरमाते हैं: हुज़ूर मुफ्तिए आज़म हिन्द रहमतुल्लाह अलैह बिला शुबा उन्ही अकबिरीन में से थे जो दिनों सुन्नियत को फरोग देने के लिए पैदा होते हैं हज़रत की पूरी ज़िन्दगी पर एक ताइराना निगाही डालिए तो ये हक़ीक़त निख़र कर सामने आजाती है के खुलूसु लिल्लाहि हिलियत उनकी शख्सियत का ट्रेड मार्क था |
उन का कोई क़ौल या अमल मेरी निगाह में ऐसा नहीं है जो खुलूसु लिल्लाहि हिलियत से आरी हो वो अगर एक तरफ मुताबाहिर आलिम, मुस्तनद, और मोतबर फ़क़ीह, मुख्तलिफ उलूम व फुनून के माहिर शेरे अदब के मिजाज़ आशना थे तो दूसरी जानिब रियाज़त इबादत, मुकाशिफ़ा व मुजाहिदा और असरार बातनि के भी मेराम थे और हर मैदान में उन के खुलूसु लिल्लाहि हिलियत की जलवागरी नुमाया तौर पर दिखाई देती थी वो एक ऐसी शमा थे जिस के गिर्द लाखों परवाने इक्तिसाबे फैज़ नूर की खातिर ज़िन्दगियों को दाओ पर चढ़ा रहे रहते थे मेरे घराने के बुज़ुर्गों से उन के देरीना और गहरे तअल्लुक़ात थे इस पस मंज़र में मुझे उनका क़ुरबे ख़ास हासिल था |

आप की तालीम व तरबियत :- हुज़ूर मुफ्तिए आज़म हिन्द रहमतुल्लाह अलैह एक ऐसे इल्मी व रूहानी खनवादे के चश्मों चिराग हैं जहाँ का पूरा माहौल इल्म व नूर के सच्चे में ढाला हुआ है फिर आप इससे मुतअस्सिर न हो ये कैसे हो सकता है चुनाचे खूब खूब इक्तिसाबे फैज़ किया और जहाँ भी मौक़ा मिला शोक से हासिल किया चुनाचे आप ने हज़रत मौलाना शाह रहम इलाही मंगलोरी व मौलाना बशीर अहमद अलीगढ़ अलैहिर्रहमा से खुसूसी दरस हासिल किया उस के | बाद उलूम व फुनून सरकार अला हज़रत रहमतुल्लाह अलैह की आग़ोशे तरबियत में जुमला उलूम व फुनून को पाए तकमील तक पहुँचाया |
तफ़्सीर, फ़िक़्ह, उसूले फ़िक़हा, सरफो नहो, के अलावा तजवीद, अदब, फलसफा, मंतिक, रियाज़ी, इल्मे जफर व तकसीर, इल्मे तौक़ीत, और फन्ने तारिख गोई में भी कमाल हासिल किया |

बैअत व खिलाफत :- आप को बैअत का शरफ़ क़ुत्बे आलम शैख़े तरीक़त हज़रत शाह अबुल हुसैन अहमदे नूरी मारेहरवी रहमतुल्लाह अलैह से था और छेह 6 साल की उमर शरीफ में आप के शैख़े तरीक़त ने बैअत करने के बाद जुमला सलासिल मसलन क़दीरिया, चिश्तिया, नक्शबंदिया, सोहरवर्दिया, मदारिया वगैरह की इजाज़त से भी नवाज़ा था अपने शैख़े तरीक़त के अलावा वालिद माजिद इमामे अहले सुन्नत फाज़ले बरेलवी रहमतुल्लाह अलैह से भी खिलाफत व इजाज़त हासिल थी |
25 सफर 1340 हिजरी मुताबिक़ 28 अक्टूबर 1921 ईस्वी बरोज़ जुमा के वालिद माजिद इमामे अहले सुन्नत फाज़ले बरेलवी रहमतुल्लाह अलैह का विसाल हुआ खलफ़े अकबर हुज़ूर हुज्जतुल इस्लाम मौलाना शाह हामिद रज़ा खान रहमतुल्लाह अलैह के मंसबे सज्जादगी और खानकाहे आलिया क़दीरिया बरकातिया रज़विया और मन्ज़रे इस्लाम के तमाम उमूर व फ़राइज़ की ज़िम्मेदारी आप के सौंप दी गई हुज़ूर हुज्जतुल इस्लाम के विसाल के बाद बा इत्तिफ़ाक़े राए हुज़ूर मुफ्तिए आज़म हिन्द रहमतुल्लाह अलैह खानकाहे आलिया क़दीरिया बरकातिया रज़विया और मन्ज़रे इस्लाम की सज्जादगी और तमाम उमूरे दीनिया के फ़राइज़ की ज़िम्मेदारी आप के सुपुर्द की गई |

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Published by husainfoundation374

सुन्नी हनफ़ी अहले सुन्नत वल जमात मसलके आला हजरत

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