हुजुर मुफ्तिये आज़म की जिंदगी
क़िस्त – 3
हज़रत अल्लामा मुफ़्ती अब्दुर रशीद साहिब फतेहपुरी :- हज़रत मौलाना मुफ़्ती गुलाम मुहम्मद खान साहब शैखुल हदीस जामिया अमजदिया नागपुर किसी से मुरीद नहीं हुए थे किसी भी सिलसिले में व बस्ता होने के लिए बेचैन थे आखिर कार एक दिन हिंदुस्तान के मशहूर आलिम हज़रत अल्लामा मुफ़्ती अब्दुर रशीद साहिब (बानी जामिया अमजदिया नागपुर) से पूछा के हुज़ूर मुरीद होने के लिए बेचैन हूँ किसी से मुरीद होना चाहिए? तो हज़रत ने इरशाद फ़रमाया मौलाना अब कहाँ ऐसे लोग रह गए हैं जो शरीअत व तरीक़त में कामिल हों सिवाए “मुफ्तिए आज़म हिन्द” के |
हुज़ूर हाफिज़े मिल्लत रहमतुल्लाह अलैह :- हुज़ूर हाफिज़े मिल्लत रहमतुल्लाह अलैह फरमाते हैं के अपने शहर में किसी को इज़्ज़त व मक़बूलियत नहीं मिलती लेकिन हुज़ूर मुफ्तिए आज़म हिन्द को अपने दयार में जो इज़्ज़तो मक़बूलियत हासिल है इस की मिसाल कहीं नहीं मिलती ये उनकी करामत विलायत की खुली दलील है मज़ीद फरमाते हैं के हुज़ूर मुफ्तिए आज़म हिन्द शहंशा हैं शहंशा यानि हज़रत के साथ शहंशा जैसा बर्ताव करना चाहिए |
हुज़ूर मुजाहिदे मिल्लत रहमतुल्लाह अलैह :- हुज़ूर मुजाहिदे मिल्लत रहमतुल्लाह अलैह फरमाते हैं इस दौर में इनकी (हुज़ूर मुफ्तिए आज़म हिन्द रहमतुल्लाह अलैह) हस्ती फ़क़ीदुल मिसाल है खुसूसियत के साथ बाबे इफ्ता में बल्के रोज़ मर्रा की गुफ्तुगू में जिस क़द्र मुहतात और मौज़ू अलफ़ाज़ और कियूद इरशाद फरमाते हैं अहले इल्म ही उनकी मंज़िल से लुत्फ़ अन्दोज़ होते हैं |
ग़ज़ालिए दौरां हज़रत अल्लामा सईद अहमद काज़मी रहमतुल्लाह अलैह फरमाते हैं :- के सय्यदी मुफ्तिए आज़म हिन्द रहमतुल्लाह अलैह की शान इस हकीकत से ज़ाहिर है के हज़रत ममदूह इमामे अहले सुन्नत मुजद्दिदे दिनों मिल्लत मौलान शाह इमाम अहमद रज़ा खान साहब बरेलवी रहमतुल्लाह अलैह के लख्ते जिगर और सही जानशीन हैं |
हज़रत कारी मुसलीहुद्दीन साहब फरमाते हैं :- हज़रत सय्यदी व मुर्शिदी सद रुश्शरिया बद रुत्तरीका के विसाल के बाद मेरी तमन्नाओं और आरज़ू का मरकज़ हुज़ूर मुफ्तिए आज़म हिन्द ही की ज़ात है और वो मेरे ही क्या तमाम सुन्नियों की तमन्नाओं का मर्कज़ हैं |
हुज़ूर शम्सुल उलमा क़ज़िए मिल्लत हज़रत अल्लामा शम्सुद्दीन रज़वी जौनपुर फरमाते हैं :- फ़िक़ह का इतना बड़ा माहिर इस ज़माने में कोई दूसरा नहीं में उनकी खिदमत में जब हाज़िर होता हूँ तो सर झुका कर बैठा रहता हूँ और ख़ामोशी के साथ उनकी बातें सुनता हूँ उन से ज़्यादा बात करने की हिम्मत नहीं पढ़ती |
हज़रत मौलाना शाह अहमद नूरी सदर जमीअतुल उलमा पाकिस्तान फरमाते हैं :- मुफ्तिए आज़म हिन्द इल्मों फ़ज़ल और फ़िक़्ही बसीरत के एतिबार से “ला सानी” थे इस्लाम और आलमे इस्लाम के लिए आप की अज़ीम ख़िदमात नाक़ाबिले फरामोश हैं |
अदीबे शहीद हज़रत मुहम्मद मियां सहिसरामी रहमतुल्लाह अलैह फरमाते हैं :- एहदे हाज़िर की लाइक सद तकरीम ज़ात और क़दम क़दम पर अक़ीदतों के फूल निछावर किए जाने वाली शख्सियत है हुज़ूर मुफ्तिए आज़म हिन्द जिनकी ज़िन्दगी का एक एक लम्हा और हयात की एक एक घड़ी सरमाए सआदत और दौलते इफ्तिखार है जिन की सारी उमर शरीअत की तालीम फ़ैलाने और तरीक़त की राह बताने गुज़री और जिन की ज़िन्दगी का एक एक अमल शरीअत की मीज़ान और तरिकक़्त की तराज़ू पर तौला हुआ है इस दौर में ममदूह की शख्सियत मुसलमानाने हिन्द की सरमदी सआदतों की ज़मानत है |
अगली कलम जारी है…………..
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मुजद्दीद इब्ने मुजद्दीद हुजूर मुफ्तिये आज़म
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