
بسم اللہ الرحمن الرحیم
الصلوۃ والسلام علیک یا رسول اللہ ﷺ
✍🏻ज़कात की फ़रज़ियत में साल के शुरू और आखिर का ऐतबार होता है ,लेहाज़ा अगर निसाब शुरू में मुक्कमल है और साल मुक़्क़मल होने पर निसाब पूरा है ,तो दौराने साल निसाब में होने वाली कमी का कोई नुकसान नहीं ,मौजूदा माल की ज़कात दी जायगी !!!
हवाला 📚
फ़ैज़ाने फ़र्ज़उलुम
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बहारे शरीअत
5/17
Is
✍🏻
साल गुजरने में क़मरी (यानि चाँद के) महीने का ऐतिबार होगा, शमसी महीनों का ऐतिबार हराम होगा*
मतलब ज़कात के लिए उर्दू (इस्लामी) महीनें देखे जाएँगे
हवाला 📚
फ़ैज़ाने फ़र्ज़उलुम

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