आप की तवाज़ो इंकिसारी :- आप के अंदर तवाज़ो इंकिसारी कूट कूट कर भरी हुई थी अगर किसी को गैर शरई हरकत पर दांत देते थे या किसी मौक़ पर नाराज़गी का इज़हार करते थे तो बाद में उसे समझाते और उसकी दिल जो फरमाते और दुआओं से नवाज़ते अक्सर लोग हज़रत की शान में मन्क़बत पढ़ते तो उन्हें उससे रोकते और फरमाते के में इस लाइक कहाँ अल्लाह पाक इस लाइक बना दे |
मांगने वाला सब कुछ पाए रोता आए हसंता जाए
ये है उन की अदना करामत मुफती आज़म ज़िंदाबाद
आप के लिए ट्रेन रुक गई :- आप सफ़रों हज़र में भी हमेशा बा जमात नमाज़ वक़्ते मुअय्यना पर अदा फरमाते | एक बार नागपुर से तशरीफ़ ले जा रहे थे रास्ते में मगरिब का वक़्त हो गया आप फ़ौरन गाड़ी से उतर पड़े लोगों ने कहा भी के गाड़ी चलने ही वाली है मगर हज़रत को फ़िक्र नमाज़ दामनगीर थी हज़रत के उतरते ही आप के साथी भी उतर पड़े वुज़ू कर के अभी नमाज़ की नियत बांधी थी के ट्रेन छूट गई हज़रत और उनके साथियों का सारा सामान ट्रेन ही में रह गया ट्रेन के चलते ही कुछ बद अक़ीदह लोगों ने फब्ती भी कसी के मियां की गाड़ी गई लेकिन हज़रत नमाज़ में मसरूफ थे नमाज़ से फारिग हुए तो पेलेट फॉर्म खली था हज़रत के साथी सामान जाने की वजह से परेशान थे मगर हज़रत मुतमइन थे अभी सब सोच ही रहे थे के सामान का क्या होगा इतने में देखा के गॉर्ड साहब भागे चले आरहे हैं और उनके पीछे पचासों मुसाफिर भी दौड़ते आ रहे हैं गॉर्ड ने कहा हुज़ूर गाड़ी रुक गई हज़रत ने फ़रमाया इंजन ख़राब हो गया है आखिर हज़रत डब्बे में बैठे इंजन बदला गया और इस तरह पोन घंटे की देर के बाद गाड़ी चली |
सरकार गौसे आज़म से आप की अक़ीदत व मुहब्बत :-
ये दिल ये जिगर है ये आँखें ये सर है
जहाँ चाहो रखो क़दम गौसे आज़म
हुज़ूर मुफ्तिए आज़म हिन्द रहमतुल्लाह अलैह को गौसे समदानी महबूबे सुब्हानी सरकार गौसे आज़म रदियल्लाहु अन्हु से कितनी अक़ीदत व मुहब्बत थी इस वाक़िये से अंदाजा होता है | एक बार सय्यदना गौसे समदानी महबूबे सुब्हानी सरकार गौसे आज़म रादियल्लाहु अन्हु की औलाद में से नो जवान पीर ताहिर अलाउद्दीन गिलानी साहब क़िब्ला बरैली शरीफ तशरीफ़ लाए तो हुज़ूर मुफ्तिए आज़म हिन्द रहमतुल्लाह अलैह की न्याज़ मंदी और अक़ीदत का ये आलम था के उनके पीछे अदब के साथ नग्गे पाऊँ चलते थे जैसे खादिम अपने आक़ा के पीछे चला करता है | हज़रत गौसे आज़म रादियल्लाहु अन्हु की ज़ात में फनाईयत का ये आलम था के आप का जिस्म व शक्ल व शबाहत हज़रत गौसे आज़म रादियल्लाहु अन्हु के हम शक्ल थीआप का मज़ारे मुबारक :- आप का मज़ारे मुबारक मुक़द्दस खानकाहे रज़विया बरैली शरीफ उत्तर प्रदेश में है इमामे अहले सुन्नत इमाम अहमद रज़ा खान बरेलवी रहमतुल्लाह अलैह के बाएं पहलू में ज़्यारत गाह खासो आम हैं हर साल लाखों अक़ीदत मंद मशाइख व उलमा दानिश्वरान शरीक होते हैं और फुयूज़ व बरकात से मुस्तफ़ीज़ होते हैं |
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