بسم الله الرحمن الرحيم
الصــلوة والسلام عليك يارسول اللهﷺ“
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समीअ (सुनने वाला) बसीर (देखने वाला) अल्लाह तआला की भी सिफत है और ये ही सिफत बंदों में भी पाई जाती है ,,
अल्लाह की सिफत और बन्दे की सिफत में फ़र्क है
❤👉 अल्लाह तआला की तमाम सिफत उस की ज़ाती (यानी खुद की) हैं उसे किसी ने दिया नहीं,,,, जब की बन्दों की सिफत अताई (यानी अल्लाह की दी हुई ) हैं ,। बन्दे अपनी सिफत में अल्लाह के मोहताज है और अल्लाह अपनी सिफत में किसी का मोहताज नहीं,
📓👉 बन्दे की सिफत महदुद (यानी उस की एक हद,सीमा,रेखा,लिमिट ) है,,,, जबकि अल्लाह की सिफत ला महदुद है यानी उस की कोई हद लिमिट नहीं
💚 👉 अल्लाह की सिफत हमेशा से है,जब की बन्दे की सिफत हमेशा से नहीं,
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अबु दाऊद की हदीस में है प्यारे आका صلی اللہ علیہ وسلم ने इरशाद फ़रमाया अपने मरने वालों पर सुरए यासीन पढ़ो
इस लिए मौत के वक़्त सकरात की हालत में यासीन शरीफ पढ़ी जाती है इस से मौत की सख़्ती कम होती है
❤👉 सुरए यासीन शरीफ मक्का में उतरी इस में 5 रुकु 83 आयतें 729 कलिमे और 3000 हर्फ हैं,
तिरमिज़ी की हदीस में है प्यारे आका ने इरशाद फ़रमाया हर चीज के लिए दिल है और क़ुरआन का दिल यासीन है और जिस ने यासीन पढ़ी अल्लाह तअाला उस के लिए 10 बार क़ुरआन पढ़ने का सवाल लिखता है
यासीन शरीफ की फजीलत 👉 जो शख्स हर जुमा को अप ने वालिदैन (मां बाप) या दोनों में से एक की जियारत के लिए उन की क़ब्र पर जाए और सुरए यासीन पढ़े तो उन के इतने गुनाह बख़्श दिए जाएंगे जितने हर्फ इस आयत में है
हज़रत अली फरमाते हैं
यासीन शरीफ को बीमार पढ़े तो शिफा पाए
यासीन शरीफ को जिस की कोई चीज गुम जाए वो पढ़े तो वो चीज़ मिल जाए
इस की एक आयत
سلم قول من رب الرحیم۔ 1469 मर्तबा पढ़ो ,इंशाअल्लाह जिस मकसद से पढ़ा जाएगा मुराद पूरी होगी,