🌹بسم الله الرحمن الرحيم 🌹
🌹🌹الصــلوة والسلام عليك يارسول اللهﷺ🌹🌹
📝)जिस पर ज़कात फ़र्ज़ है…उस के बदले उस ने मोहताजों को ज़कात की नीयत से खाना खिला दिया, या कपड़ा बना दिया…..तो ज़कात अदा न होगी…
👉🏻इसलिए के यह मालिक कर देना न हुआ हाँ अगर खाना दे दे की चाहे खाये या ले जाये तो अदा हो जायगी .नीयत से कपड़ा दे दिया तो ज़कात अदा हो जायगी !!!
हवाला 📚
क़ानूने शरीअत
सफह no.192
📝👉🏻ज़कात किस किस को नहीं दे सकते …👇🏻
👉🏻अपनी अस्ल यानी (माँ ,बाप,दादा ,दादी ,नाना ,नानी वगैरह जिनकी औलाद में यह है )और अपनी औलाद (यानी पोता ,पोती ,नवासा , नवासी वगैरा ) को ज़कात नहीं दे सकते !!!
👉🏻औरत शौहर को और शौहर औरत को ज़कात नहीं दे सकते …तलाक़ हो चूका हो इद्दत पूरी हो चुकी हो तो दे सकता है!!
👉🏻ग़नी मर्द के नाबालिग बच्चे को ज़कात नहीं दे सकते और ग़नी की बालिग़ औलाद को दे सकते है जबकि यह फ़क़ीर हो !!
👉🏻बनी हाशिम को ज़कात नहीं दे सकते …बनी हाशिम से यहा मुराद हज़रत अली व हज़रत जाफ़र व हज़रत अब्बास व हारिस इब्ने मुत्तलिब की औलादे है !!
👉🏻ज़िम्मी काफ़िर को न ज़कात दे सकते है न कोई सदक़ा वाजिबा(जैसे नज़र ,कफ़्फ़ारा ,सदक़ए फ़ित्र)
👉🏻बद मज़हब को ज़कात देना जाइज़ नहीं और इसी तरह उन मुरतदीन को भी देने से अदा न होगी जो ज़बान से तो इस्लाम का दावा करते है लेकिन खुदा व रसूल की शान घटाते है या किसी और दीनी का इंकार करते है !
हवाला 📚
क़ानूने शरीअत
सफह no.207